सुप्रीम कोर्ट वूमन लॉयर्स एसोसिशन ने पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू द्वारा दिए गए आपत्तिजनक और महिला विरोधी बयान की कड़ी आलोचना की है। काटजू ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कमेंट करते हुए कहा था कि महिला वकील जज को आंख मारकर मनमाफिक आदेश हासिल कर सकती हैं।
एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा कि ऐसी टिप्पणियां न सिर्फ अपमानजनक हैं बल्कि हर महिला वकील की गरिमा, प्रतिष्ठा, योग्यता, ईमानदारी और पेशेवर पहचान पर सीधा हमला करती हैं। संघ के अनुसार यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट का एक पूर्व न्यायाधीश, जिसे संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई थी, वह महिला वकीलों की मेहनत और योग्यता का मजाक उड़ाते हुए भेदभावपूर्ण शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है।
महिला वकील संघ ने कहा कि इस तरह के बयान न केवल महिला वकीलों का अपमान करते हैं बल्कि न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़ा करते हैं और समाज में पुरानी गलत धारणाओं को बढ़ावा देते हैं। एक पूर्व न्यायाधीश की ओर से आया यह बयान निंदनीय है और संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ है।
महिला वकीलों ने काटजू से बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की है। साथी ही न्यायपालिका के सभी हिस्सेदारों से अपील की है कि वह इस तरह की सोच को पूरी तरह खारिज करें और उसकी निंदा करे क्योंकि यह लैंगिक समानता और न्यायिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाती है।
सुप्रीम कोर्ट महिला वकील संघ ने कहा कि न्यायपालिका से जुड़े हर सदस्य को यह याद रखना चाहिए कि शब्दों का गहरा असर होता है। जिन्होंने संवैधानिक पद संभाला है, वे हमेशा इस जिम्मेदारी को निभाएं कि न्यायपालिका की गरिमा और समानता का लक्ष्य आगे बढ़ाया जा सके।
महिला वकील संघ ने अपने सदस्यों से कहा कि ऐसे बयान आपके आत्मविश्वास को कभी कमजोर न करें। हम न अपमान सहेंगे, न ही चुप रहेंगे और न किसी पुराने सोच वाले सांचे में ढलेंगे। हमारी पहचान हमारी बुद्धि, ईमानदारी और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता से तय होती है। संघ ने स्पष्ट किया कि वह न्याय के लिए अपने संकल्प और प्रतिबद्धता को हमेशा कायम रखेगा।
