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चुनाव के वक्त ही कांग्रेस को क्यों आई आडवाणी की याद? समझिए कमलनाथ की क्रोनोलॉजी

Madhya Pradesh Election: कांग्रेस नेता कमलनाथ को लालकृष्ण आडवाणी की याद आई, वो भी मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले.. अब सियासत में संयोग और प्रयोग का चलन बहुत पुराना है। अचानक कांग्रेस ने आडवाणी के नाम पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला करना शुरू कर दिया। चुनाव से पहले इस मुद्दे के उठने की वजह समझिए..

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कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले उठाया सिंधी समाज का मुद्दा।

MP Chunav News: कमलनाथ का दावा है कि भाजपा ने आडवाणी का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और सिंधी समाज को धोखा दिया। इस दावे का समय और वजह समझने से पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार होने वाले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आखिर लालकृष्ण आडवाणी पर क्या टिप्पणी की है और इसके क्या सियासी मायने हैं।

कमलनाथ ने आडवाणी के नाम पर भाजपा को कोसा

कमलनाथ ने एमपी विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले सिंधी समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि '2008 में एक विवाह समारोह के दौरान सिंधी लोगों ने मुझसे कहा था कि वे आडवाणी के कारण भाजपा को वोट देंगे। अब आडवाणी जी कहां हैं? भाजपा ने उनका अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।' पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरोप लगाया कि 'भाजपा ने सिंधी समुदाय को धोखा दिया है।' उन्होंने समुदाय से अपने भविष्य की रक्षा के लिए कांग्रेस को वोट देने की अपील की।

लालकृष्ण आडवाणी के मुद्दे को क्यों भुना रहे कमलनाथ?

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पार्टियों के बीच जुबानी युद्ध छिड़ चुकी है। कांग्रेस नेताओं ने शिवराज सिंह चौहान की सरकार और भाजपा की खामियां गिनाने का सिलसिला तेज कर दिया है। वहीं भाजपा नेता भी अपनी गद्दी बचाए रखने के लिए अपनी सरकार की खूबियां गिनाकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। कमलनाथ को इस बात का पूरा अंदाजा है कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में सिंधी समाज को अपनी ओर आकर्षित करके वो भाजपा के साथ मजबूती से दो-दो हाथ कर सकते हैं।

जानिए कैसे सिंधी समाज ने भाजपा की बढ़ाई है टेंशन

इसी साल मार्च के महीने में ग्वालियर सिंधी समाज ने भाजपा को बड़ा झटका देते हुए ये आरोप लगाया था कि सिंधियों की उपेक्षा हो रही है। उस वक्त ग्वालियर सिंधी समाज ने राहुल गांधी और कमलनाथ का साथ देने का ऐलान किया था। आपको बता दें, जनसंघ के दौर से ही ग्वालियर सिंधी समाज भाजपा से जुड़ा रहा है। जब मार्च के महीने में उनके तेवर बदल गए, तो शिवराज सिंह चौहान की टेंशन बढ़ गई। इसी के बाद सिंधी समाज के लोगों पर कमलनाथ और कांग्रेस ने अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी।

कमलनाथ की नजर, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर..

मध्य प्रदेश की सियासत में कमलनाथ इस वक्त कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर फ्रंटफुट पर हैं। उन्हें ये बेहतर समझ है कि अगर कांग्रेस की वापसी होगी, तो सीएम की कुर्सी के लिए उनके सामने कोई नहीं टिकेगा। पिछली बार ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के बीच कुर्सी को लेकर जबरदस्त मनमुटाव देखा गया। इस साल अगर कांग्रेस सत्ता में वापसी करती है, तो कमलनाथ की राह लगभग क्लीयर है। ऐसे में सिंधी समाज को आकर्षित करने के लिए कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें जोर-शोर से उठाकर कमलनाथ वापसी का प्लान बना रहे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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