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एक SDM को कितनी मिलती है सैलरी? जानें ज्योति मौर्या और सफाई कर्मी पति के वेतन में कितना है अंतर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 8, 2023, 01:03 PM IST

Jyoti Maurya SDM: ज्योति मौर्या एसडीएम बनने के बाद अपने सफाई कर्मचारी पति को छोड़ना चाहती हैं। दरअसल, एक एसडीएम के मुकाबले चतुर्थ श्रेणी सफाई कर्मचारी का पद काफी छोटा होता है। दोनों के रहन-सहन और वेतनमान में भी काफी अंतर होता है।

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ज्योति मौर्या एसडीएम

Jyoti Maurya SDM: उत्तर प्रदेश के बरेली की एसडीएम ज्योति मौर्या और उनके पति आलोक मौर्या का झगड़ा अदालत पहुंच चुका है। यह विवाद देशभर में चर्चा का भी केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस विवाद की खूब चर्चा हो रही है। ज्यादातर लोगों की संवेदनाएं ज्योति मौर्या के सफाई कर्मचारी पति आलोक मौर्या के प्रति हैं, और लोग कह रहे हैं कि इस व्यक्ति के साथ गलत हुआ है।

हालांकि, इस विवाद की जड़ क्या है, यह साफ नहीं है। लेकिन आलोक मौर्या बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी को पढ़ा-लिखाकर एसडीएम बनाया और अब वह किसी और के लिए उन्हें धोखा दे रही हैं। दरअसल, ज्योति मौर्या ने तलाक के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की है। ऐसे में हम आपको बताएंगे ज्योति मौर्या और पति आलोक मौर्या के बीच विवाद की जड़ गया है? दोनों किस पद पर तैनात हैं और एक एसडीएम और सफाई कर्मचारी की सैलरी में कितना अंतर होता है? आइए जानते हैं...

विवाद की जड़ गया क्या है?

ज्योति मौर्या बरेली में एसडीएम के पद पर तैनात हैं। वह आलोक मौर्या की पत्नी हैं, जो कि पंचायत राज विभाग में सफाई कर्मचारी हैं। बीते दिनों आलोक ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी एसडीएम बनने के बाद उन्हें धोखा दे रही हैं। वह होमगार्ड कमांडेंट मनीष दुबे के साथ रिलेशनशिप में हैं और उसके लिए उन्हें छोड़ना चाहती हैं। अलोक का दावा है कि उन्होंने ज्योति मौर्या को पढ़ाया है।

लोग क्या कह रहे हैं?

जब से यह विवाद सोशल मीडिया पर छाया है, लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। ज्यादातर सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा ज्योति मौर्या पर फूट रहा है। लोगों का कहना है कि ज्योति मौर्या एसडीएम बनने के बाद अपने सफाई कर्मचारी पति को छोड़ना चाहती हैं। दरअसल, एक एसडीएम के मुकाबले चतुर्थ श्रेणी सफाई कर्मचारी का पद काफी छोटा होता है। दोनों के रहन-सहन और वेतनमान में भी काफी अंतर होता है।

कितनी होती है एसडीएम की सैलरी और उसकी सुविधाएं

उत्तर प्रदेश में एक सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) को 56100 रुपये से अधिकतम 1,77500 रुपये तक बेसिक सैलरी मिलती है। DA-21,318 रुपये और HRA- 4488 से लेकर 15147 रुपये तक होता है। इन हैंड सैलरी - 77792 रुपये (शुरुआती) होती है। इसके अलावा एसडीएम को ट्रांसपोर्ट एलाउंस, सरकारी आवास, सुरक्षा गार्ड, माली, कुक, टेलीफोन कनेक्शन, मुफ्त बिजली जैसी सुविधाएं मिलती हैं।

एक सफाई कर्मचारी की सैलरी

उत्तर प्रदेश में एक सफाई कर्मी का वेतनमान 5200 रुपये और 1800 रुपये ग्रेड पे होता है। इसके अनुसार, उसे कुल 25,596 रुपये इन हैंड सैलरी प्राप्त होती है। इसके अलावा सफाइ कर्मचारी को स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, शिक्षा अनुदान, बेरोजगारी भत्ता, जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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