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जस्टिस वर्मा केस : FIR दर्ज कर जांच की मांग वाली अर्जी खारिज, SC ने कहा- सस्ती लोकप्रियता के लिए दायर हुई याचिका

सुप्रीम कोर्ट में यह अर्जी अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने दायर की थी। याचिका में उपाध्याय ने दलील दी कि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति वर्मा को अब सुप्रीम कोर्ट के 2019 के 'वीरास्वामी बनाम भारत संघ' फैसले के तहत मिलने वाली न्यायिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिलता।

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जस्टिस वर्मा के आवास से मिले थे जले हुए नोट।

Justice Verma : दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर जले हुए नोट मिलने के मामले एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि संज्ञेय अपराध के मामले में केवल इन-हाउस जांच पर्याप्त नहीं है,बल्कि पुलिस को एफआईआर दर्ज कर आपराधिक जांच करनी चाहिए। याचिका में मांग की गई थी कि कोर्ट सीबीआई के नेतृत्व में स्वतंत्र एसआईटी से जांच कराने का निर्देश दे और सुप्रीम कोर्ट जांच की निगरानी करे।

'जस्टिस वर्मा को न्यायिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिलता'

शीर्ष अदालत में यह अर्जी अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने दायर की थी। याचिका में उपाध्याय ने दलील दी कि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति वर्मा को अब सुप्रीम कोर्ट के 2019 के 'वीरास्वामी बनाम भारत संघ' फैसले के तहत मिलने वाली न्यायिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिलता। इस फैसले में कहा गया था कि किसी कार्यरत हाईकोर्ट के न्यायाधीश, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बिना एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।

दिल्ली पुलिस को विस्तृत शिकायत सौंपी थी

याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता ने 2 जून 2026 को सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दिल्ली पुलिस को विस्तृत शिकायत सौंपी थी, लेकिन अब तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि शिकायत में संज्ञेय अपराध का स्पष्ट खुलासा किया गया है, इसके बावजूद संबंधित एजेंसियों ने कानून के तहत अनिवार्य आपराधिक प्रक्रिया शुरू नहीं की। इस याचिका में भारत संघ, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दिल्ली के पुलिस आयुक्त को प्रतिवादी बनाया गया है।

जस्टिस वर्मा ने न्यायिक पद से इस्तीफा दिया

जस्टिस वर्मा का मामला तब चर्चा में आया, जब उनके आधिकारिक आवास पर आग लगने के बाद कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिलने की बात सामने आई। इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच कराई। जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने उनके खिलाफ महाभियोग (इम्पीचमेंट) की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने न्यायिक पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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