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क्या NDA में सब ठीक? नीतीश कुमार के लिए ये क्या बोल गए जीतन राम मांझी

Jitan Ram Manjhi on Nitish Kumar: जीतन राम मांझी ने कहा, मुझे नीतीश कुमार ने मेरी पार्टी का जदयू में विलय कर लेने या अलग हो जाने को कहा था। हमारी पार्टी का एक भी कार्यकर्ता विलय के पक्ष में नहीं था। हमने सभी से संपर्क करने के बाद अलग होने का निर्णय लिया।

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Jitan Ram Manjhi vs Nitish Kumar

Photo : BCCL

Jitan Ram Manjhi on Nitish Kumar: केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख मांझी अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने उन्हें सीएम पद से हटाने के लिए दबाव बनाया था और नई पार्टी बनाने पर उनका मजाक भी उड़ाया था।

गया से सांसद जीतन राम मांझी (76) ने कहा, जब मैंने पार्टी बनाई थी, तब नीतीश कुमार ने मेरा मजाक उड़ाया था। उनका सोचना था कि मैं संगठन नहीं चला पाऊंगा क्योंकि मेरे पास वित्तीय सहारा नहीं था। वर्षों बाद, ऐसा प्रतीत होता है कि हम और अधिक मजबूत होते जा रहे हैं।

जदयू में पार्टी के विलय का भी बनाया गया था दबाव

जीतन राम मांझी ने कहा, मुझे नीतीश कुमार ने मेरी पार्टी का जदयू में विलय कर लेने या अलग हो जाने को कहा था। हमारी पार्टी का एक भी कार्यकर्ता विलय के पक्ष में नहीं था। हमने सभी से संपर्क करने के बाद अलग होने का निर्णय लिया। तब उनके बेटे संतोष सुमन ने विलय के दबाव के विरोध में राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। बता दें, मांझी ने 2020 में कुछ समय के लिए नीतीश कुमार से हाथ मिलाया था और उनके बेटे संतोष सुमन को नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में मंत्री पद मिला था। इस दौरान मांझी ने पिछले साल हुए प्रकरण को भी याद किया जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा विरोधी दलों को एकजुट करने में जुटे थे। इसी के फलस्वरूप इंडिया गठबंधन बना था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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