देश

झारखंड में हेमंत सोरेन की भाभी की बेटियों के साथ दुर्व्यवहार, सीता सोरेन ने पोस्ट किया वीडियो

Jharkhand News: सीता सोरेन की तीन बेटियां जयाश्री, राजश्री और विजयश्री सोरेन चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद जामताड़ा में अपनी गाड़ी की ओर जा रही थीं, तब कांग्रेस समर्थकों ने शोर मचाते हुए उन्हें घेरने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें भीड़ के बीच सुरक्षित निकाला।

Image

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने की सीता सोरेन की बेटियों की हूटिंग।

Jharkhand News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी व जामताड़ा विधानसभा सीट पर भाजपा की प्रत्याशी रहीं सीता सोरेन की हार के बाद कांग्रेस समर्थकों ने उनकी तीन बेटियों की बुरी तरह हूटिंग की। इस घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो से न सिर्फ सीता सोरेन आहत हैं, बल्कि कई लोग इसकी भर्त्सना कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सीता सोरेन की तीन बेटियां जयाश्री, राजश्री और विजयश्री सोरेन चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद जामताड़ा में अपनी गाड़ी की ओर जा रही थीं, तब कांग्रेस समर्थकों ने शोर मचाते हुए उन्हें घेरने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें भीड़ के बीच सुरक्षित निकाला।

देखें वीडियो -

सीता सोरेन ने पोस्ट किया वीडियो

सीता सोरेन ने इस घटनाक्रम का वीडियो शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, जमीन पर जनता के लिए लड़ाई लड़ना आसान नहीं होता। इस चुनाव में, मैंने अपनी पूरी ताकत लगाई, लेकिन परिणाम हमारे पक्ष में नहीं आया। जब मैंने एक वीडियो देखा, जिसमें मेरी बेटियों को कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा अपमानित करते हुए देखा, तो मेरा दिल टूट गया। यह वही जामताड़ा है, जहां मेरे पति ने अपना खून-पसीना बहाकर जनता की सेवा की थी। लेकिन आज, उनकी बेटियों को अपमानित होते देख, यह सवाल उठता है कि क्या यही वह सम्मान है, जो जनता ने उनके त्याग और संघर्ष को दिया है?" सीता सोरेन ने लिखा, "मेरी बेटियों ने हर शब्द और हर अपमान का सामना शेरनियों की तरह किया, उन्होंने सिर ऊंचा करके अपनी मर्यादा बनाए रखी। मुझे गर्व है कि मेरी बेटियां दुर्गा सोरेन जी की तरह मजबूत और निडर हैं। उन्होंने यह दिखा दिया कि यह हार हमारी हिम्मत को कमजोर नहीं कर सकती।"

कांग्रेस जहां भी है, वहां महिलाएं असुरक्षित

सीता सोरेन ने आगे लिखा, "यह हार एक सबक है, एक नई शुरुआत है। यह मत भूलना मैंने इन्हें शेरनियों की तरह पाला है। अकेले रहते हुए एक हाथ से राजनीति की बागडोर संभाली और दूसरे हाथ से अपनी बेटियों की परवरिश की है। बस डर इस बात की है कि सुरक्षा होते हुए इन गीदड़ों में इतनी हिम्मत है तो बेसहारे गरीब महिलाओं-बेटियों को क्या नहीं झेलना पड़ता होगा। कांग्रेस जहां भी है, वहां महिलाएं असुरक्षित हैं। मासूम आदिवासी आपके छल और झूठ के जाल में फंसे हुए हैं, लेकिन वह दिन जरूर आएगा, जब यही आदिवासी आपको इस संथाली धरती से उठा फेंकेंगे।"

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!

संबंधित खबरें