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Jharkhand: हेमंत सरकार पर जमकर बरसे सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, सड़क निर्माण विभाग में हुआ 106 करोड़ रुपये का घोटाला!

Jharkhand Politics: झारखंड के गिरिडीह से सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने सूबे की हेमंत सोरेन सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि सड़क निर्माण विभाग में 106 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। इसकी जांच के लिए उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) CBI और मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।

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चंद्र प्रकाश चौधरी vs हेमंत सोरेन

Ranchi News: क्या झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने सड़क निर्माण विभाग में 100 करोड़ रुपये से अधिक का गबन किया है? इस घोटाले का आरोप गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने लगाया है। सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने दावा किया है कि झारखंड सरकार के सड़क निर्माण विभाग (Road Construction Department in Government of Jharkhand) में लगभग 106 करोड रुपये का घोटाला हुआ है। उन्होंने इसके लिए एक चिट्ठी लिखी है, सांसद ने ये चिट्ठी झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, मंत्रिमंडल निगरानी एवं समन्वय विभाग, पथ निर्माण विभाग, झारखंड सरकार, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एंटी क्रप्शन ब्यूरो (ACB) को पत्र लिखी है।

क्या हेमंत राज में हुआ 100 करोड़ से ज्यादा का घोटाला?

सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि 'झारखंड में पथ निर्माण विभाग में भी घोटाले हो रहे हैं। जहां सभी विभाग में निम्न टेंडर प्रक्रिया है, वहीं पथ निर्माण में BOQ से ज्यादा राशि में कुछ चुनिंदा कंपनी को कार्य आवंटन किया जा रहा है। 100 करोड़ से ज्यादा का घोटाला तो ई-टेंडर पोर्टल (E-Tender Portal) से ही पता चल रहा है। बाकी जांच एजेंसिया, जांच करेंगी तब और कितने करोड़ का घोटाला होगा? ये किसके इशारे पर किया जा रहा था? यही है झामुमो- कांग्रेस का व्यापार, जवाब दे घोटाले की सरकार।'

उन्होंने ये मांग करते हुए आगे लिखा मुख्य सचिव , झारखंड सरकार कृपया संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय जांच करवाइए।

आजसू सांसद ने आगे लिखा कि 'भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, झारखंड कृपया संज्ञाओं लीजिए कि आखिर किन अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के वजह से यह काम किया जा रहा है और इस भ्रष्टाचार की धुरी कौन है।'

चंद्र प्रकाश चौधरी ने अपने पत्र में ये लिखा कि वर्तमान में झारखंड सरकार के RCD विभाग के द्वारा आमंत्रित व आवंटित निविदाओं में अनियमितता बरती जा रही है जिससे सरकार को वित्तीय क्षति हो रही है। विदित हो कि विभाग के संबंधित पदाधिकारियों द्वारा कई निविदाओं में BOQ राशि से ज़्यादा राशि पर कुछ विशेष प्रतिभागी निवेदाकारों को लाभ पहुंचाने के लिए निविदा कार्यों का निस्तारण/आवंटन किया जा रहा है।

विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन का क्या होगा?

झारखंड की सियासत में इन दिनों काफी उठापटक देखने को मिल रही है। एक तरफ जेल से बाहर आने के बाद हेमंत सोरेन ने सारा मोर्चा अपने कंधों पर संभाल लिया है, वहीं दूसरी ओर चंपई सोरेन के तौर पर जेएमएम को लगे झटके के बाद सारा समीकरण बदल चुका है। ऐसे में गिरिडीह सांसद के इस दावे के बाद सियासत में भूचाल आना लाजमी माना जा रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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