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एक-दूजे के हुए जीत अडानी और दिवा शाह, सादगी से सम्पन्न हुआ विवाह; पिता गौतम अडानी ने साझा की तस्वीरें

Jeet Adani Wedding: देश के जाने-माने उद्योगपति गौतम अडानी के छोटे बेटे जीत अडानी आज अहमदाबाद में शादी के अटूट बंधन में बंध गए हैं। जीत की शादी हीरा कारोबारी जैमिन शाह की बेटी दीवा से हुई। पिता गौतम अडानी ने विवाह की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं।

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जीत अडानी और दिवा शाह ने गुजराती रीति-रिवाज के अनुसार रचाई शादी।

Jeet Adani and Diva Shah got Married: देश के जाने माने उद्योगपति और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के छोटे बेटे जीत अडानी और दिवा शाह शादी के पवित्र बंधन में बंध गए हैं। पिता गौतम अडानी ने शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं। अहमदाबाद के अडानी शांतिग्राम टाउनशिप शांतिग्राम में जीत अडानी ने हीरा कारोबारी जैमिन शाह की बेटी दिवा से गुजराती रीति-रिवाज के अनुसार शादी रचाई। परिवार के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, ये शादी एक साधारण समारोह था, जिसमें सामान्य धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पारंपरिक गुजराती समारोह हुआ जिसमें केवल करीबी रिश्तेदार और दोस्त ही शामिल हुए।

जीत और दिवा को गौतम अडानी ने दी बधाई

गौतम अडानी ने अपने छोटे बेटे की शादी की तस्वीरें साझा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, 'परमपिता परमेश्वर के आशीर्वाद से जीत और दिवा आज विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए। यह विवाह आज अहमदाबाद में प्रियजनों के बीच पारंपरिक रीति रिवाजों और शुभ मंगल भाव के साथ संपन्न हुआ। यह एक छोटा और अत्यंत निजी समारोह था, इसलिए हम चाह कर भी सभी शुभचिंतकों को आमंत्रित नहीं कर सके, जिसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूं। मैं आप सभी से बेटी दिवा और जीत के लिए स्नेह और आशीष का हृदय से आकांक्षी हूं।'

पिछले महीने महाकुंभ मेले में अपनी यात्रा के दौरान गौतम अडानी ने कहा था कि उनके बेटे की शादी "सरल और पारंपरिक तरीके से" होगी। अपने बेटे जीत अडानी की शादी के भव्य और शानदार होने की सभी अफवाहों और अटकलों पर लगाम लगाते हुए उद्योगपति गौतम अडानी ने शादी को सरल रखा और 10,000 करोड़ रुपये का दान भी दिया।

दिव्यांगों को वित्तीय सहायता देने की अनूठी पहल

शादी से ठीक दो दिन पहले गौतम अडानी ने दिव्यांग नवविवाहित महिलाओं की सहायता के लिए एक कार्यक्रम 'मंगल सेवा' की घोषणा की। जीत और दीवा ने 'मंगल सेवा' नामक पहल के तहत सालाना 500 नवविवाहित दिव्यांग महिलाओं को 10-10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का संकल्प लिया। जीत अडानी ने इस पहल को शुरू करने के लिए 21 नवविवाहित दिव्यांग महिलाओं और उनके पतियों से मुलाकात की। जिसके बाद अडानी समूह के चेयरमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर की।

अडानी समूह की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे जीत

जीत ने जून 2020 में अडानी समूह की कंपनी अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स के डायरेक्टर पद की जिम्मेदारी संभाली हैं, जो देश की सबसे बड़ी एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है। एयरपोर्ट बिजनेस के अलावा वह अडानी समूह के रक्षा, पेट्रोकेमिकल्स और कॉपर बिजनेस की देखरेख भी करते हैं। जीत अडानी समूह के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का भी नेतृत्व कर रहे हैं।

जीत अडानी ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड अप्लाइड सांइस से स्नातक की डिग्री हासिल की है। अपनी मां डॉ. प्रीति अडानी से प्रेरित होकर जीत भी समाजसेवा के काम में जुट गए और वह दिव्यांगों की सहायता करना चाहते हैं। दरअसल, जीत की मां ने अडानी फाउंडेशन को एक छोटे ग्रामीण प्रोजेक्ट से एक वैश्विक सामाजिक परिवर्तन संस्था में तब्दील किया है।

जीत अडानी अहमदाबाद में रहते हैं, जहां अडानी समूह का मुख्यालय है। उन्होंने साल 2023 में अडानी समूह के ग्रीनएक्स टॉक्स की शुरुआत की थी, जहां पर दिव्यांगजन अपनी प्रेरणात्मक कहानियों से दुनिया को रूबरू कराते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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