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उमर अब्दुल्ला और अमित शाह के बीच हुई मुलाकात, जानें जम्मू-कश्मीर से जुड़े किन मुद्दों पर हुई बात

Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने देश के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा था कि राज्य का दर्जा बहाल करने सहित कई मुद्दे हैं, जिन पर उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री से बात करने की जरूरत है। अब्दुल्ला और शाह की ये दूसरी मुलाकात है।

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उमर अब्दुल्ला ने अमित शाह से मुलाकात की।

Omar Abdullah met Amit Shah: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर केंद्र-शासित प्रदेश का राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने सहित कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। अगस्त 2019 में तत्कालीन राज्य के पुनर्गठन के बाद इस साल अक्टूबर में केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने वाले अब्दुल्ला की यह शाह के साथ दूसरी मुलाकात थी।

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की मांग

अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा शीघ्र बहाल होने के प्रति आशावादी हैं और इसके लिए संभवत: एक संभावित समयसीमा पर काम करेंगे। इस मुद्दे के अलावा मुख्यमंत्री कार्य संचालन नियमों (टीबीआर) को स्पष्ट करने की मांग करेंगे, ताकि वह विभिन्न विभागों के संबंध में निर्वाचित सरकार की शक्तियों की स्पष्ट समझ हासिल कर सकें।

अमित शाह से मुलाकात पर क्या बोले सीएम उमर अब्दुल्ला

दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ अपनी बैठक पर जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, "गृह मंत्री के साथ बैठक जम्मू-कश्मीर की स्थिति, राज्य का दर्जा बहाल करने के संबंध में थी। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने पर बातचीत हुई और उम्मीद है कि इसे बहाल किया जाएगा। फिलहाल कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की जिम्मेदारी एलजी की है। मैंने गृह मंत्री से कहा है कि आतंकवाद और उग्रवाद से सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लोगों को शामिल करके और चुने हुए प्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर नहीं निपटा जा सकता।"

गृह मंत्री अमित शाह से कई मुद्दों पर बात करने की थी तैयारी

अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा था कि राज्य का दर्जा बहाल करने सहित कई मुद्दे हैं, जिन पर उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री से बात करने की जरूरत है। उन्होंने नयी दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित 18वें वार्षिक पर्यटन सम्मेलन 2024 से इतर पत्रकारों से कहा था, "ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन पर मुझे गृह मंत्री से बात करने की जरूरत है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर एक केंद्र-शासित प्रदेश है और हम राज्य का दर्जा मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। केंद्र-शासित प्रदेश में गृह मंत्री की एक अलग भूमिका होती है।"

इससे पहले, अब्दुल्ला ने 16 अक्टूबर को पदभार ग्रहण करने के बाद राष्ट्रीय राजधानी की अपनी पहली यात्रा के दौरान 23 अक्टूबर को शाह से मुलाकात की थी। हालांकि, इस मुलाकात को एक शिष्टाचार भेंट के रूप में देखा गया था। अधिकारियों ने बताया था कि अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री को स्थिति से अवगत कराया था और राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर भी चर्चा की थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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