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संभल हिंसा के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची जमीयत उलेमा-ए-हिंद, पुलिस पर लगाए कई आरोप, कर दी है बड़ी मांग

24 नवंबर की सुबह संभल की शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण किया गया था। इस दौरान मस्जिद के पास अराजक तत्वों ने सर्वेक्षण टीम पर पथराव कर दिया। देखते ही देखते माहौल बिगड़ता चला गया। हिंसा के दौरान चार लोगों की मौत हो गई।

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संभल मस्जिद सर्वे के दौरान हुई थी हिंसा

Photo : PTI
KEY HIGHLIGHTS
  • संभल हिंसा में मारे गए थे चार लोग
  • मस्जिद की सर्वे टीम पर हुआ था पथराव
  • पुलिस को छोड़ने पड़े थे आंसू गैस के गोले

उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने देश में संभल जैसी घटना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील कर कई मांगे की हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने पुलिस पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने क्या कहा

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने उत्तर प्रदेश के संभल जैसी घटना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मौलाना अरशद मदनी ने कहा, "पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए कानून के वास्तविक स्वरूप को लागू करने की कमी के कारण देश में संभल जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। इन घटनाओं को रोका जाना बहुत जरूरी है। पूजा स्थल अधिनियम-1991 के बावजूद निचली अदालतें मुस्लिम पूजा स्थलों का सर्वेक्षण करने के आदेश जारी कर रही हैं, जो कि कानून का उल्लंघन है।"

मौलाना अरशद मदनी का दावा

उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने पूजा स्थलों की सुरक्षा के कानून की सुरक्षा और उसके प्रभावी कार्यान्वयन (लागू) के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर पिछले एक साल से कोई सुनवाई नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने केंद्र की मोदी सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए कई बार मोहलत दी थी, लेकिन मामले की सुनवाई नहीं हो सकी थी। अब संभल की घटना के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अपील की है और जल्द से जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया है।

पुलिस पर लगाए आरोप

मौलाना अरशद मदनी ने संभल में पुलिस फायरिंग की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पुलिस की बर्बरता का एक लंबा इतिहास है, चाहे वह मलियाना हो या हाशिमपुरा, मुरादाबाद, हलद्वानी या संभल, हर जगह पुलिस का एक ही चेहरा देखने को मिलता है। पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना और लोगों के जीवन तथा संपत्ति की रक्षा करना है। लेकिन, दुर्भाग्य से पुलिस शांति की वकालत करने की बजाय अल्पसंख्यकों और विशेषकर मुसलमानों के साथ एक पार्टी की तरह व्यवहार करती है। मौलाना ने कहा कि संभल में अराजकता, अन्याय और क्रूरता की एक जीती-जागती तस्वीर है, जिसे न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के लोग अपनी आंखों से देख रहे हैं। अब नौबत गोलियों तक पहुंच गई है। कैसे संभल में बिना उकसावे के सीने में गोली मार दी गई। कई वीडियो वायरल हो चुके हैं, लेकिन अब एक बड़ी साजिश के तहत प्रशासन ये बताने की कोशिश कर रहा है कि जो लोग मारे गए, वो पुलिस ने नहीं, बल्कि किसी और की गोली से मरे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या पुलिस ने गोली नहीं चलाई, जबकि पुलिस की बंदूकों से गोलियों की बारिश हो रही थी, पूरी सच्चाई कैमरे में कैद है।

बाबरी मस्जिद विवाद का मुद्दा भी उठाया

उन्होंने कहा कि पुलिस को बचाने का मतलब है कि पुलिस ने मुस्लिम युवाओं को मारने के लिए अपनी रणनीति बदल दी है। इसके लिए उन्होंने अवैध हथियारों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। सिर्फ एक संभल ही नहीं देश के कई जगहों पर जिस तरह से विवाद हो रहे हैं, हमारे पूजा स्थलों के बारे में और जिस तरह से स्थानीय न्यायपालिका इन मामलों में गैर-जिम्मेदाराना फैसले ले रही है, वह 1991 में लाए गए धार्मिक पूजा स्थल अधिनियम का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विवाद पर जो फैसला सुनाया है, वह अपमानजनक है। इस फैसले का इस्तेमाल करते हुए यह माना गया कि अयोध्या में कोई मस्जिद नहीं बनाई गई थी, जिसे मुसलमानों ने कड़वा घूंट के रूप में पी लिया है, क्योंकि, इस फैसले से देश में शांति और व्यवस्था स्थापित होगी। जबकि, फैसले के बाद सांप्रदायिक शक्तियों का मनोबल बढ़ गया है। अब इस फैसले के बाद भी मस्जिदों की नींव में मंदिर तलाशे जा रहे हैं। इसका मतलब है कि देश में सांप्रदायिक ताकतें शांति और एकता की दुश्मन हैं। सरकार चुप है, लेकिन पर्दे के पीछे से ऐसे लोगों का समर्थन करती नजर आ रही है, जिसका ताजा प्रमाण संभल की घटना है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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