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तैयार हुआ ITPO कॉम्प्लेक्स: G20 देशों का होगा जमावड़ा, जानिए इस महामंच से जुड़ी हर छोटी और बड़ी बात

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 23, 2023, 01:15 PM IST

ITPO complex: 123 एकड़ क्षेत्र में फैला यह परिसर बैठकों, सम्मेलनों और प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए भारत का सबसे बड़ा स्थल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 जुलाई को उद्घाटन कर सकते हैं।

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ITPO complex

Photo : ANI

ITPO complex: देश में इसी साल 9 व 10 सितंबर को होने वाले जी20 सम्मेलन के लिए दिल्ली का ITPO कॉम्प्लेक्स बनकर तैयार हो चुका है। 123 एकड़ में फैले इस परिसर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 जुलाई को उद्घाटन कर सकते हैं। बता दें, आईटीपीओ परिसर को प्रगति मैदान परिसर के नाम से भी जाना जाता है।

123 एकड़ क्षेत्र में फैला यह परिसर बैठकों, सम्मेलनों और प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए भारत का सबसे बड़ा स्थल है। सूत्रों के मुताबिक, आईटीपीओ परिसर का पुनर्विकसित व आधुनिक आईईसीसी (इंटरनेशनल एग्जिबिशन कम कन्वेंशन सेंटर) परिसर दुनिया के शीर्ष 10 प्रदर्शनी और सम्मेलन परिसरों में से एक है। इस कॉम्प्लेक्स को जी20 बैठक के लिए दोबारा विकसित किया गया है।

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7,000 व्यक्तियों की बैठने की क्षमता

ITPO कॉम्प्लेक्स के कन्वेंशन सेंटर के लेवल 3 पर 7,000 व्यक्तियों की बैठने की क्षमता है। जबकि, ऑस्ट्रेलिया में प्रतिष्ठित सिडनी के ओपेरा हाउस में 5,500 व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है। इसके चलते IECC वैश्विक स्तर पर मेगा सम्मेलनों, अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों और सांस्कृतिक समारोहों की मेजबानी के लिए उपयुक्त स्थान है ।

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प्रदर्शनी हॉल

सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शनी हॉल में उत्पाद, नये विचारों का प्रदर्शन करने के लिए सात आधुनिक स्थल हैं। इसके साथ ही आईईसीसी में एक बड़ा एम्फीथिएटर है, जिसमें 3,000 लोगों के बैठने की क्षमता है। करीब तीन पीवीआर थिएटरों के बराबर एम्फीथिएटर में सांस्कृतिक कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित किए जा सकते हैं।

पार्किंग स्थल

आईईसीसी में आने वालों के लिए पार्किंग की भी विशेष सुविधा है। यहां 5,500 से अधिक वाहनों की पार्किंग की जा सकती है। सिग्नल-मुक्त सड़कों के माध्यम से पहुंच में आसानी यह सुनिश्चित करती है कि आगंतुक बिना किसी परेशानी के कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सकें।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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