अंतरिक्ष में जोड़ें जाएंगे चंद्रयान-4 के अलग-अलग हिस्से
इसरो प्रमुख का कहना है कि चंद्रयान-4 का वजन बहुत वजनी होने वाला है। यह वजन इतना होगा कि इसरो के पास अभी मौजूदा सबसे शक्तिशाली रॉकेट है उससे इसे एक बार में भेजना आसान नहीं होने वाला है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन और इसी तरह के पहले की सभी अंतरिक्ष उपक्रमों का निर्माण अंतरिक्ष में यान के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर हुआ है। फिर भी, दुनिया में यह शायद पहली बार होगा जब एक अंतरिक्षयान को अलग-अलग हिस्सों में रवाना किया जाएगा और फिर इसे स्पेस में आपस में जोड़ा जाएगा।
हमारा अभी का रॉकेट उतनी शक्तिशाली नहीं-सोमनाथ
रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली में एक कार्यक्रम से इतर सोमनाथ ने कहा, 'चंद्रयान-4 में कौन-कौन से हिस्से एवं उपकरण होंगे, इसका हमने खाका खींच लिया है..चांद की सतह से नमूने कैसे लाए जाएंगे यह भी हमने सोच लिया है। हमारी योजना एक बार में नहीं बल्कि रॉकेट से कई बार में अंतरिक्ष यान के हिस्सों को स्पेस में भेजने की है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे पास अभी जो सबसे शक्तिशाली रॉकेट है उसकी क्षमता इतना वजन ले जाने के लिए पर्याप्त नहीं है।'
जापानी अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का सहयोग कर रही
बता दें कि भारत का चंद्रयान-3 मिशन सफल रहा। यह चंद्रमा के सबसे कठिन माने जाने वाले हिस्से साउथ पोल पर उतरा। इसकी सफल सॉफ्ट लैंडिंग हुई। चंद्रमा के इस हिस्से पर उतरने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना। अब इसरो का लक्ष्य अपने इस मिशन के जरिए चांद की सतह से नमूने धरती पर लाना है। इससे पहले हाल ही में चीन ने ऐसा कारनामा किया है। इस मिशन की सफलता के लिए इसरो और जापान की एजेंसी जाक्सा मिलकर काम कर रही हैं।
