देश

गगनयान पर इसरो चीफ ने दिया बड़ा अपडेट, जनवरी तक दुनिया देखेगी ताबड़तोड़ लॉन्चिंग

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 15, 2023, 08:41 AM IST

Gaganyaan Mission ISRO: इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा, 21 अक्टूबर को होने वाली पहली टीवी-डी1 परीक्षण उड़ान के बाद अंतरिक्ष एजेंसी महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम के तीन और परीक्षण उड़ान मिशन को अंजाम देगी। उन्होंने कहा, गगनयान अभियान में मानव दल को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और उन्हें सुरक्षित हिंद महासागर में उतारा जाएगा।

Image

इसरो प्रमुख एस सोमनाथ

Photo : ANI

Gaganyaan Mission ISRO: इसरो के मिशन गगनयान को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। अब इस मिशन पर इसरो चीफ एस सोमनाथ ने बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने कहा है कि गगनयान के पहले टेस्ट व्हीकल डी1 की परीक्षण उड़ान 21 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा, पहले परीक्षण उड़ान के बाद इसरो गगनयान मिशन के और परीक्षणों को भी अंजाम देगा।

तमिलनाडु के मदुरै में इस बहुप्रतीक्षित मिशन पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर को होने वाली पहली टीवी-डी1 परीक्षण उड़ान के बाद अंतरिक्ष एजेंसी महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम के तीन और परीक्षण उड़ान मिशन को अंजाम देगी। उन्होंने कहा, गगनयान अभियान में मानव दल को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और उन्हें सुरक्षित हिंद महासागर में उतारा जाएगा। परीक्षण वाहन विकास उड़ान (टीवी-डी1) का परीक्षण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में किया जाएगा।

बहुत क्रिटिकल है क्रू एस्केप सिस्टम

इसरो चीफ ने कहा, गगनयान में क्रू एस्केप सिस्टम एक बहुत ही क्रिटिकल सिस्टम होता है। अगर रॉकेट को कुछ होता है तो आपको चालक दल को विस्फोटित रॉकेट से कम से कम 2 किलोमीटर दूर ले जाकर बचाना होगा। उन्होंने कहा, इसलिए यह परीक्षण उड़ान की स्थिति में एक चालक दल को बचान की प्रणाली को प्रदर्शित करने के लिए है।

जनवरी से पहले होंगी 4 से 5 लॉन्चिंग

इसरो चीफ ने कहा, हम जो परीक्षण करने जा रहे हैं उसे ट्रांसोनिक स्थिति कहा जाता है। हर महीने हम कम से कम एक प्रक्षेपण करेंगे। इस परीक्षण वाहन प्रक्षेपण के बाद, हमारे पास जीएसएलवी है। फिर हमारे पास एसएसएलवी है। फिर उसके बाद, गगनयान मानव रहित मिशन होगा। बीच में पीएसएलवी प्रक्षेपण होगा। इसलिए जनवरी से पहले, आप कम से कम 4-5 प्रक्षेपण देखेंगे।

आदित्य एल1 को लेकर भी दिया अपडेट

एस सोमनाथ ने आदित्य एल1 को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, भारत का पहला सौर मिशन आदित्य-एल1 जनवरी के मध्य तक लैग्रेंज प्वाइंट 1 (एल1) पर पहुंच जाएगा। वर्तमान में पृथ्वी से L1 बिंदु तक यात्रा करने में करीब 110 दिन लगते हैं। इसलिए जनवरी के मध्य तक यह L1 बिंदु तक पहुंच जाएगा। फिर उस बिंदु पर हम लैग्रेंज बिंदु में सम्मिलन करेंगे, इसे हेलो कक्षा कहा जाता है। यह एक बड़ी कक्षा है। इसलिए यह जनवरी के मध्य तक होगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article