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Aditya L1: आदित्य एल 1 ने लगाई चौथी छलांग, एक और चक्कर के बाद निकलेगा 1.21 लाख किमी लंबे सफर पर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 15, 2023, 11:29 AM IST

Aditya L1: इससे पहले इसरो तीन बार अर्थ बाउंट फायर के जरिए आदित्य एल-2 की कक्षा को बदल चुका है। आखिरी बार 10 सितंबर की देर रात तीसरी बार आदित्य एल1 की कक्षा बदली गई थी। इसे पृथ्वी से 296 किमी x 71,767 किमी की कक्षा में स्थापित किया गया था।

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आदित्य एल1 ने चौथी बार बदली अपनी कक्षा

Photo : Twitter

Aditya L1: भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 ने एक बार फिर छलांग लगाकर अपनी कक्षा को बदल लिया है। इसरो के मुताबिक, शुक्रवार देर रात इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। अब आदित्य एल-1 की नई कक्षा 256 किमी x 121973 किमी है।

इसरो ने बताया अब 19 सितंबर को रात 2 बजे इसे पृथ्वी की कक्षा से निकाल कर लैग्रेंज प्वाइंट एल-1 की कक्षा में स्थापित करने के लिए ऑर्बिट बढ़ाई जाएगी। इसके लिए अर्थ बाउंड फायर किए जाएंगे। इसरो की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चौथी बार सफलतापूर्वक कक्षा बदलने के ऑपरेशन के दौरान मॉरीशस, बंगलूरू और पोर्ट ब्लेयर स्थित इसरो के ग्राउंट स्टेशनों से मिशन को ट्रैक किया गया।

तीन बार बदल चुका है अपनी कक्षा

बता दें, इससे पहले इसरो तीन बार अर्थ बाउंड फायर के जरिए आदित्य एल-2 की कक्षा को बदल चुका है। आखिरी बार 10 सितंबर की देर रात तीसरी बार आदित्य एल1 की कक्षा बदली गई थी। इसे पृथ्वी से 296 किमी x 71,767 किमी की कक्षा में स्थापित किया गया था, तब से यह इसी कक्षा में चक्कर काट रहा था। इससे पहले 5 सितंबर को आदित्य एल-1 ने दूसरी बार अर्थ बाउंट फायर किया था। वहीं सबसे पहली बार तीन सितंबर को आदित्य एल-1 ने पहली बार अपनी कक्षा को सफलतापूर्वक बदला था।

15 लाख किलोमीटर दूर जाएगा आदित्य एल-1

भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो ने इसी महीने 2 सितंबर को देश के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 को लॉन्च किया था। आदित्य एल-1 अपनी यात्रा के दौरान 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इस अंतरिक्ष यान को एल-1 प्वाइंटर पर स्थापित किया जाएगा, जहां सूरज की सबसे बाहरी परतों और एल-1 पर सौर हवा का अवलोकन करेगा। इसरो के मुताबिक, इस मिशन से तारों के अध्ययन में काफी मदद मिलेगी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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