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'क्या मेरे बैग में बम है...?' कोच्चि एयरपोर्ट पर एक यात्री ने CISF जवानों को चौंकाया, हुआ गिरफ्तार

Cochin International Airport: कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्पि में बताया गया कि प्री-एम्बार्केशन सुरक्षा जांच के दौरान यात्री मनोज कुमार ने CISF अधिकारी से पूछा कि क्या मेरे बैग में कोई बम है? इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों ने उसके बैग की गहन जांच की और उसे गिरफ्तार कर लिया।

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Cochin international airport

Photo : iStock

Cochin International Airport: केरल के कोच्चि एयरपोर्ट पर उस वक्त अफरा-तरफी मच गई, जब मुंबई जा रहे एक यात्री ने बम का जिक्र कर सुरक्षा कर्मियों को चिंता में डाल दिया। इसके बाद मौके पर मौजूद CISF जवानों ने एक्शन लेते हुए यात्री को गिरफ्तार कर लिया और गहन जांच के बाद उसे पुललिस को सौंप दिया। एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया कि यह घटना एयर इंडिया की फ्लाइट AI 682 के दौरान हुई। यह फ्लाई कोच्चि से मुंबई जा रही थी।

अधिकारियों के मुताबिक, बम की धमकी देने वाले यात्री की पहचान 42 वर्षीय मनोज कुमार के रूप में हुई है। उसने हवाई अड्डे पर एक्स-रे बैगेज इंस्पेक्शन सिस्टम (XBIS) चेकपॉइंट पर CISF अधिकारियों के सामने खतरनाक टिप्पणी की। इसके बाद उससे पूछताछ की गई और फ्लाइट को समय पर रवाना कर दिया गया।

जांच के दौरान किया बम का जिक्र

कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्पि में बताया गया कि प्री-एम्बार्केशन सुरक्षा जांच के दौरान यात्री मनोज कुमार ने CISF अधिकारी से पूछा कि क्या मेरे बैग में कोई बम है? इस बयान ने तुरंत चिंता पैदा कर दी और हवाई अड्डे की सुरक्षा टीम को तुरंत कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया। बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) द्वारा यात्री के केबिन और चेक किए गए बैगेज की गहन जांच की गई। आवश्यक जांच पूरी करने के बाद फ्लाइट को तय समय पर रवाना कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि आगे की जांच के लिए यात्री मनोज कुमार को पुलिस के हवाले किया गया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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