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झारखंड में बदल रही है डेमोग्राफी! संथाल परगना में आदिवासी घटकर 28% पर पहुंचे और मुस्लिम 40% के पास, ईसाईयों की संख्या भी बढ़ी

झारखंड के पाकुड़ और साहिबगंज में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी बढ़ी है। ईसाइयों की संख्या में छह हजार गुणा तक की वृद्धि हुई है। याचिका में कहा गया है कि जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, साहिबगंज आदि झारखंड के बॉर्डर इलाके से बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड आ रहे हैं।

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झारखंड में बदल रही है डेमोग्राफी, केंद्र ने दाखिल किया हलफनामा (प्रतीकात्मक फोटो- Jharkhand Tourism)

KEY HIGHLIGHTS
  • झारखंड में बढ़ रही है मुस्लिम आबादी
  • आदिवासियों की घट रही है संख्या
  • ईसाई धर्म मामने वाले भी बढ़े

झारखंड में बीजेपी के नेता दावा करते रहे हैं कि राज्य की डेमोग्राफी बदल रही है। कभी आदिवासी पहचान वाले झारखंड में अब मुस्लिम समुदाय की आबादी बढ़ रही है। सिर्फ मुस्लिम समुदाय की ही नहीं बल्कि केंद्र की ओर से जारी किए हलफनामे के अनुसार ईसाई धर्म मानने वालों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है।

'संथाल परगना आदिवासियों की संख्या घटी'

झारखंड के संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ के मामले को लेकर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया है। IANS की रिपोर्ट के अनुसार संथाल परगना प्रमंडल की डेमोग्राफी में आदिवासी आबादी की हिस्सेदारी में 16 फीसदी की गिरावट आई है। यहां पहले आदिवासियों की आबादी 44 फीसदी थी, जो घटकर 28 फीसदी हो गई है। केंद्र सरकार ने आदिवासी आबादी में गिरावट के मुख्य रूप से दो कारण बताए हैं। पहला, पलायन और दूसरा धर्मांतरण।

'ईसाइयों की संख्या में छह हजार गुणा तक की वृद्धि'

केंद्र सरकार ने अपने जवाब में इस प्रमंडल के छह जिलों की डेमोग्राफी में विगत वर्षों में आए बदलाव की बात को स्वीकार किया है। बताया गया है कि इन जिलों में मुस्लिम आबादी में 20 से 40 फीसदी की वृद्धि हुई है। पाकुड़ और साहिबगंज में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी बढ़ी है। ईसाइयों की संख्या में छह हजार गुणा तक की वृद्धि हुई है।

'बांग्लादेशियों की घुसपैठ की स्थिति अलार्मिंग'

इससे पहले 5 सितंबर को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने कहा था कि संथाल परगना में बांग्लादेशियों की घुसपैठ की स्थिति अलार्मिंग है। इसकी वजह से इलाके की डेमोग्राफी प्रभावित हो रही है। इसी वजह से आदिवासी आबादी के प्रतिशत में गिरावट भी गंभीर विषय है। घुसपैठिए झारखंड के रास्ते देश के अन्य राज्यों में घुसकर वहां की आबादी को प्रभावित कर सकते हैं।

राज्य के अधिकारियों का इनकार

इस मामले में संथाल परगना प्रमंडल के छह जिलों के उपायुक्तों की ओर से पूर्व में दाखिल किए गए जवाब में बांग्लादेशी घुसपैठ से इनकार किया गया था। इसपर कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि अगर घुसपैठ का एक भी मामला मिला तो संबंधित उपायुक्त पर अवमानना का केस चल सकता है। बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका जमशेदपुर निवासी दानियल दानिश ने दायर की है।

याचिका में क्या-क्या दावे

याचिका में कहा गया है कि जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, साहिबगंज आदि झारखंड के बॉर्डर इलाके से बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड आ रहे हैं। इससे इन जिलों में जनसंख्या में कुप्रभाव पड़ रहा है। इन जिलों में बड़ी संख्या में मदरसे स्थापित किए जा रहे हैं। स्थानीय आदिवासियों के साथ वैवाहिक संबंध बनाया जा रहा है। उनके अधिवक्ता ने राष्ट्रीय जनगणना के हवाले से हाईकोर्ट के समक्ष जो डाटा पेश किया है, उसके मुताबिक साल 1951 में संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी आबादी 44.67 प्रतिशत से घटकर साल 2011 में 28.11 प्रतिशत हो गई। इसके पीछे की एक बड़ी वजह बांग्लादेशी घुसपैठ है। अगर इस सिलसिले पर रोक नहीं लगाई गई तो स्थिति गंभीर हो जाएगी।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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