Zojila Tunnel: ईरान में आसमान से मिसाइलें बरसने के बावजूद, ईरानी इंजीनियर यूसुफ इसहाकपुर रहीमबादी उस परियोजना पर ध्यान लगाए हुए हैं जो लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों को साल भर जोड़े रखेगी। अपने देश में जारी संघर्ष से हजारों मील दूर भारत में जोजिला सुरंग के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हुए रहीमाबादी को बेहद कड़ाके की ठंड, भारी बर्फबारी और दुर्गम रास्तों का सामना करना पड़ता है।
कौन हैं यूसुफ रहीमाबादी?
रहीमाबादी का भारत से विशेष जुड़ाव है। उन्होंने अपनी पढ़ाई भारत में ही की और फिर यहीं शादी भी की। यही वजह है कि वह भारत को अपना "दूसरा घर" मानते हैं। जोजिला सुरंग परियोजना में उनकी मुख्य जिम्मेदारी निर्माण कार्य की निगरानी और डिजाइन नियंत्रण की है। जब मंगलवार को महत्वाकांक्षी जोजिला सुरंग परियोजना में एक बड़ी कामयाबी मिली, तो वह खुशी और गर्व से भर गए और उन्होंने इस उपलब्धि को ''बहुत बड़ा मील का पत्थर'' बताया।
जोजिला सुरंग परियोजना के मौजूदा अथॉरिटी इंजीनियर रहीमाबादी ने कहा कि इतनी शानदार परियोजना पर काम करना सम्मान की बात है। उन्होंने कहा, ''मैं ईरान से हूं। मैं जोजिला परियोजना पर काम कर रहा हूं। इस परियोजना पर काम करना बहुत सम्मान की बात है। यह एक शानदार परियोजना है और देश के लिए गर्व की बात है।''
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कब तक खुलेगी जोजिला सुरंग?
रहीमाबादी ने कहा, ''कई चुनौतियां थीं, लेकिन हमने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। बाकी काम पूरा करने और सुरंग को जनता के लिए खोलने में अभी 2 से 2.5 साल और लगेंगे।'' उन्होंने कहा, ''यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुरंग है। यह कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी देगी। आपातकालीन स्थिति में रक्षा बल इस सुरंग का इस्तेमाल कर सकेंगे।''

जोजिला सुरंग
ईरानी इंजीनियर इस परियोजना की निगरानी कर रही संयुक्त उद्यम कंपनी इंटरकॉन्टिनेंटल कंसल्टेंट्स एंड टेक्नोक्रैट्स प्राइवेट लिमिटेड (ICT) और अनाडजीवाला इंफ्रा एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड (AIAPL) की टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। सुरंग का निर्माण हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) द्वारा किया जा रहा है।
रहीमाबादी इस महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना का एक अहम चेहरा रहे हैं। उन्होंने कई महीनों तक परियोजना की निगरानी की और इसके विभिन्न चरणों का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तापमान माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। यहां का भूभाग बेहद कठिन है और अक्सर सड़कें बंद रहती हैं। भारी बर्फबारी के कारण जोजिला दर्रा लंबे समय तक कट जाता है। ऐसे हालात में 1.15 करोड़ मानव-घंटों का काम पूरा करना कोई मामूली बात नहीं है।
