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भारत में दो लाख रुपये से अधिक खर्चा कर विदेश से आ रहे लोग, 9 अप्रैल को केरल में डालेंगे वोट

UAE to Kerala For Voting: देश के कई राज्यों में चुनाव आ रहे हैं। इनमें एक केरल भी है। आमतौर पर, चुनावों के दौरान केरल के हजारों-लाखों प्रवासी अपना मताधिकार का प्रयोग करने के लिए घर लौटते हैं।

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भारत में दो लाख रुपये से अधिक खर्चा कर विदेश से आ रहे लोग, 9 अप्रैल को केरल में डालेंगे वोट

Kerala Assembly Elections: UAE में रहने वाले कई प्रवासी भारत लौटने के लिए भारी रकम खर्च कर रहे हैं। 2026 के आगामी केरल विधानसभा चुनावों में मतदान करने के लिए लोग भारत आ रहे हैं और वे हवाई टिकटों के लिए Dh9,000 (₹230,000) तक का भुगतान कर रहे हैं। बता दें कि राज्य में चुनाव के तहत 9 अप्रैल को मतदान निर्धारित है।

आमतौर पर, केरल से हजारों-लाखों प्रवासी चुनाव के दौरान अपना वोट डालने के लिए घर लौटते हैं। हालांकि, खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार हवाई किराए में बढ़ोतरी के कारण केरल को खाड़ी देशों से आने वाले मतदाताओं की संख्या कम रहने की उम्मीद है। केरल में 9 अप्रैल को मतदान होना है, जहां सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) 81 वर्षीय मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश करेगा।

40 वर्षीय प्रवासी रॉय जॉर्ज कुछ महीने पहले ही यूनाइटेड किंगडम से केरल लौटे हैं और लगभग 10 साल के अंतराल के बाद वोट डालने की तैयारी कर रहे हैं। वह अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए वापस आए थे और अब वह खुद को प्रवासन और वापसी जैसी चुनौतियों के बीच पाते हैं। समाचार एजेंसी PTI ने उनसे बात की है।

कोट्टायम जिले के चंगनाशेरी के मूल निवासी रॉय ने कहा कि उन्हें इस बात का पक्का पता नहीं है कि वे भविष्य में अपना वोट डाल पाएंगे या नहीं। यह उस दुविधा को दर्शाता है जिसका सामना केरल के कई ऐसे परिवार कर रहे हैं जो बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश चले गए हैं।

चुनावों में प्रवासन बना एक अहम मुद्दा

चुनाव प्रचार में प्रवासन एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक मोर्चों ने केरल के भीतर ही बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया है, ताकि लोगों को विदेश जाने के लिए मजबूर न होना पड़े। हालांकि, रॉय ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ नौकरियों तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह अच्छी बात है कि राजनीतिक पार्टियां चुनाव में प्रवासन पर चर्चा कर रही हैं। लेकिन, ज्यादातर लोग सिर्फ नौकरियों के लिए ही बाहर नहीं जाते। केरल और विदेशों के बीच वेतन का अंतर बहुत ज्यादा है, जो हमें विदेश जाने के लिए आकर्षित करता है।'

उनके पारिवारिक बैकग्राउंड में भी यही पैटर्न दिखता है। उनके माता-पिता खाड़ी देशों से लौटे हैं, जबकि उनके भाई-बहन अभी विदेश में काम कर रहे हैं। परिवार के पास राज्य में बड़े रबर के बागान भी हैं।

रॉय ने यह भी बताया कि कैसे माइग्रेशन कई परिवारों के लिए एक लंबे समय की सच्चाई बन गया है। उन्होंने कहा, 'हमारे बच्चे विदेश की जिंदगी के आदी हो चुके हैं और केरल लौटने के बजाय UK में रहना पसंद करते हैं। भले ही हमें अपनी जन्मभूमि की याद आती हो, लेकिन हो सकता है कि हमें विदेश में ही रहना पड़े, क्योंकि हमारे बच्चे वहीं बस जाएंगे।'

कांग्रेस ने उठाए सवाल

राजनीतिक पार्टियों ने भी चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को उठाया है। कांग्रेस नेताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि शिक्षा और औद्योगिक हालात ठीक न होने की वजह से छात्र और नौकरी की तलाश करने वाले लोग राज्य छोड़कर जा रहे हैं। कांग्रेस सांसद हिबी ईडेन ने PTI को बताया कि पार्टी उन लोगों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो केरल में ही रहना चाहते हैं, लेकिन अवसरों की कमी के कारण उन्हें वहां से जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि यूरोप और अमेरिका के बराबर वेतन देना एक चुनौती बना रहेगा।

पीएम मोदी का वादा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA की एक रैली के दौरान कहा कि केरल में ऐसे मौके पैदा किए जाएंगे, ताकि युवाओं को नौकरी के लिए कहीं और जाने पर मजबूर न होना पड़े। वहीं, सत्ताधारी LDF ने राज्य में अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले सभी युवाओं को रोजगार देने का वादा किया है।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट (IIMD) के चेयरमैन एस. इरुदया राजन ने कहा कि 2023 के अनुमानों के अनुसार, केरल के लगभग 23-25 लाख लोग विदेशों में काम कर रहे हैं, जबकि 10-15 लाख लोग भारत के अन्य राज्यों में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासन एक लंबे समय से चला आ रहा चलन है, जिसे रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने आगे कहा कि खाड़ी देशों में प्रवास करने वाले लोग अक्सर जीवन के बाद के पड़ाव में लौट आते हैं, लेकिन यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में प्रवास का परिणाम आमतौर पर वहां स्थायी रूप से बस जाना होता है। उन्होंने बदलती जनसांख्यिकी की ओर भी इशारा किया, जिसके चलते मध्य और दक्षिणी केरल के कई घर या तो बंद पड़े हैं, या फिर उनमें केवल बुज़ुर्ग माता-पिता ही रहते हैं।

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Nitin Arora
नितिन अरोड़ा author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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