Indigo विवाद के बीच ट्रेन ड्राइवरों ने बयां किया दर्द, पायलटों की तरह काम के घंटे तय करने की मांग
- Edited by: Pushpendra Kumar
- Updated Dec 9, 2025, 07:51 PM IST
भारतीय रेलवे के लोको पायलट (ड्राइवर) अपनी ड्यूटी के घंटों को सीमित करने के मुद्दे को हवा दे दी हैं। ट्रेन चालक थकान से बचने और रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए काम के घंटों में रियायत और सीमित कार्य अवधि की मांग की है। यह मांग इंडिगो में हुए संकट के बाद एयरलाइन पायलटों के लिए सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए की है।
लोकों पायलटों ने काम के घंटे तय करने की रखी डिमांड
इंडिगो संकट के बीच भारतीय रेलवे के लोको पायलटों ने भी अपने हक की बात रखी है। वर्षों से लगातार काम और थकान कम करने और रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ड्यूटी के घंटों की सीमा तय करने की मांग उठाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) ने लोको पायलटों के लिए एयरलाइन पायलटों के समान मानदंड लागू करने की मांग की है। इनमें यात्री (कोचिंग) ट्रेनों के लिए ड्यूटी के 6 घंटे और मालगाड़ियों के लिए 8 घंटे, 16 घंटे की ट्रिप रेस्ट और 30 घंटे का विश्राम शामिल है। साथ ही रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार महिला कर्मचारियों के लिए उचित सुविधाएं प्रदान करना शामिल है।
लोकों पायलटों का यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब इंडिगो बड़े व्यवधानों में से एक से जूझ रहा है, जिसका मुख्य कारण उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) मानदंड हैं, जिसके कारण देशभर के हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं।
इंडिगो के साथ नरमी क्यों?
एआईएलआरएसए का आरोप है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ सख्त है, लेकिन इंडिगो जैसी बड़ी निजी कंपनियों के साथ नरमी बरतती है। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को विरोध करने पर सजा मिलती है, लेकिन निजी एयरलाइंस बिना किसी नतीजे के सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर सकती हैं। लिहाजा 28 नवंबर को यूनियन ने बेहतर वेतन, टैक्स में राहत और वर्किंग कंडीशन की मांग को लेकर 48 घंटे की भूख हड़ताल का आह्वान किया।
यूनियन ने लगातार रात्रि ड्यूटी को केवल दो शिफ्टों तक सीमित करने, पायलट दल के 36 घंटों के भीतर अपने मुख्यालय लौटने का नियम बनाने, 120 किलोमीटर की न्यूनतम गारंटीकृत माइलेज और मुख्यालय बाईपास पर काम पूरी तरह से बंद करने की भी मांग की। यूनियन ने कहा कि ट्रेन चालकों को भी पायलटों जैसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है और वे कई वर्षों से बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं।
कार्य के घंटे और रेस्ट टाइमिंग (एचओईआर), 2005 के नियम 8 के अनुसार एक लोको पायलट को दो-साप्ताहिक अवधि में औसतन प्रति सप्ताह 52 घंटे काम करना आवश्यक है।
अगस्त माह में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि लोको पायलटों के काम के घंटों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है और उनकी कार्य स्थितियों में सुधार के लिए मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं। उदाहरण देते हुए बताया कि एसी रनिंग रूम, योग और ध्यान के लिए स्थान, न्यूज पेपर पढ़ने के कमरे और आराम के समय कर्मचारियों के लिए उचित भोजन और पीने का पानी की व्यवस्था बेहतर की जा रही है।
एसोसिएशन ने कहा कि दुनिया भर में रेल कर्मचारी ड्यूटी-घंटे और आराम के नियमों के तहत काम करते हैं। AILRSA ने बताया कि यूरोपीय संघ के रेलवे सख्त संचयी ड्यूटी (Railway Strict Cumulative Duty) और आराम की सीमाओं का पालन करते हैं। वहीं, अमेरिकी रेलमार्ग अनिवार्य ऑफ-ड्यूटी आराम के साथ सेवा घंटे अधिनियम के तहत काम करते हैं और ऑस्ट्रेलिया और कनाडा क्रू ड्यूटी शेड्यूल तैयार करने के लिए उन्नत जैव-गणितीय मॉडल (Advanced Bio-mathematical Models) का उपयोग करते हैं।
क्या है इंडिगो के हालात
नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने लोकसभा में मंगलवार को कहा कि बजट एयरलाइन इंडिगो के ऑपरेशंस में स्थिरता आ रही है और देश की बाकी की अन्य सभी एयरलाइंस का परिचालन सामान्य बना हुआ है। साथ ही उन्होंने हाल ही में बड़ी संख्या में इंडिगो द्वारा फ्लाइट्स रद्द किए जाने पर कहा कि किसी भी एयरलाइन को यात्रियों के साथ यह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। बताया कि डीजीसीए ने इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और एक विस्तृत जांच शुरू की है। रिपोर्ट के आधार पर, सख्त और उचित कार्रवाई की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने सदन में कहा कि इंडिगो को जवाबदेह ठहराया जा रहा है। किसी भी एयरलाइन को, चाहे वह कितनी भी बड़ी क्यों न हो, योजना की विफलताओं या नियमों का पालन न करने के कारण यात्रियों को ऐसी परेशानी देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नायडू ने यह भी स्पष्ट किया कि संशोधित पायलट और क्रू रोस्टरिंग नियमों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मंत्री ने आगे कहा कि 5 से 15 दिसंबर के बीच रद्द की गई उड़ानों के लिए रिफंड, सामान की खोज और यात्री सहायता उपाय नागर विमानन मंत्रालय की निगरानी में हो रहे हैं।"
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संकट से निपटने के उपायों के तहत, "इंडिगो को तुरंत रिफंड जारी करने का आदेश दिया गया था और 750 करोड़ रुपए से अधिक की राशि यात्रियों तक पहुंच चुकी है। केंद्रीय मंत्री बताया कि यात्रियों को शोषण से बचाने के लिए एयरलाइन ने विमानों के किरायों की सीमा तय की है। इसके अलावा नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इंडिगो को अपने डेली ऑपरेशन को 5 प्रतिशत से घटाने का आदेश दिया है। साथ ही, रिवाइजड शेड्यूल को 10 दिसंबर 5 बजे तक शेयर करने को कहा है।
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