करीब पांच दशक पहले नौसैनिक रणनीतिकार केन बूथ ने नौसेनाओं की भूमिका को सैन्य शक्ति, कूटनीति और पुलिसिंग के संतुलन के रूप में परिभाषित किया था। आज भारतीय नौसेना इस सिद्धांत का सबसे सशक्त उदाहरण बन चुकी है। तटीय रक्षा तक सीमित रहने के बजाय भारतीय नौसेना अब पूरे इंडो-पैसिफिक में एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। भारतीय महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने टकराव की जगह सहयोग और विश्वास निर्माण का रास्ता चुना है। नियमित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास, क्षमता निर्माण और समुद्री डोमेन अवेयरनेस साझा करने से भारत ने क्षेत्रीय देशों के साथ मजबूत साझेदारी बनाई है।
भारतीय नौसेना ने इनमें लिया हिस्सा
साल 2025 में भारतीय नौसेना ने 18 से अधिक द्विपक्षीय अभ्यास, 8 बहुपक्षीय अभ्यास, 31 मैरीटाइम पार्टनरशिप एक्सरसाइज, 4 CORPAT, 12 संयुक्त EEZ निगरानी अभियानों में हिस्सा लिया। भारतीय नौसेना की भूमिका “Net Security Provider” से आगे बढ़कर अब साझेदारी आधारित मॉडल में बदल चुकी है। वियतनाम को INS Kirpan, मोजाम्बिक को फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट और श्रीलंका में Maritime Rescue Coordination Centre जैसी पहलें इस सोच को दर्शाती हैं कि भारत अपने पड़ोसियों को सक्षम बनाना चाहता है, नियंत्रित नहीं।
First Responder के रूप में किया स्थापित
आपदा के समय भारतीय नौसेना ने खुद को क्षेत्र की सबसे भरोसेमंद First Responder के रूप में स्थापित किया है। म्यांमार भूकंप, श्रीलंका चक्रवात संकट और समुद्र में फंसे विदेशी जहाज़ों के रेस्क्यू अभियानों में भारतीय युद्धपोत और नौसैनिक विमान घंटों के भीतर मौके पर पहुंचे। इन अभियानों में मानवीय संवेदनशीलता, तेज प्रतिक्रिया और पेशेवर दक्षता साफ दिखाई दी। गुरुग्राम स्थित Information Fusion Centre – IOR (IFC-IOR) इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। यह केंद्र कई देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है, जिससे हिंद महासागर में किसी भी संकट पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो पाती है।
समुद्री शक्ति का असली माप क्या है?
ASEAN देशों के साथ First Training Squadron की हालिया तैनाती ने यह साफ किया कि भारत की समुद्री कूटनीति केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय और सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी आधारित है। स्कूल विजिट, योग, खेल और संयुक्त अभ्यास, ये सभी भारत की “Human Centric Naval Diplomacy” को दर्शाते हैं। आज भारतीय नौसेना यह साबित कर रही है कि समुद्री शक्ति का असली माप हथियारों से नहीं, बल्कि भरोसे से होता है। SAGAR और MAHASAGAR जैसे दृष्टिकोणों के साथ भारत हिंद महासागर को एक सुरक्षित, मुक्त और साझा क्षेत्र बनाए रखने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
