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सेना को मिली बड़ी कामयाबी, पुंछ से हिजबुल मुजाहिद्दीन का एक आतंकवादी गिरफ्तार

Hizbul Mujahideen Terrorist Arrested: सेना के अधिकारियों ने बताया कि हिजबुल आतंकी अब्दुल खलील के पास से एक पिस्तौल और कुछ गोला-बारूद बरामद किए गए। खलील, प्रतिबंधित हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादियों की सीमा पार से घुसपैठ कराने के दौरान मार्गदर्शक के तौर पर काम करता था।

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सेना ने एक आतंकी को गिरफ्तार किया।

Photo : BCCL

Hizbul Mujahideen Terrorist Arrested: जम्मू-कश्मीर के पुंछ, राजौरी, किश्तवाड़ और डोडा जिलों के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार को सुरक्षा बलों द्वारा शुरू किए गए तलाश अभियान के दौरान हिजबुल मुजाहिद्दीन के एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि उत्तर कश्मीर के बांदीपोरा निवासी अब्दुल खलील को आतंकवाद निरोधक अभियान के दौरान पुंछ जिले के सुरनकोट इलाके से गिरफ्तार किया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, हिजबुल आतंकी अब्दुल खलील के पास से एक पिस्तौल और कुछ गोला-बारूद बरामद किए गए। खलील, प्रतिबंधित हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों की सीमा पार से घुसपैठ कराने के दौरान मार्गदर्शक के तौर पर काम करता था। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आतंकवादी के पास से एक मोबाइल फोन और कई पाकिस्तानी सिम कार्ड जब्त किए गए हैं।

सेना ने की छह गांव की घेराबंदी

अधिकारियों ने बताया कि पुंछ के देहरा की गली इलाके में दो संदिग्ध आतंकवादियों की गतिविधि की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने करीब छह गांवों में घेराबंदी और तलाश अभियान शुरू किया। उन्होंने बताया कि सोमवार देर रात देहरा की गली के पास सलामपुरा गांव में काले कपड़े पहने दो हथियारबंद संदिग्ध घूमते देखे गए थे। सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने राष्ट्रीय राइफल्स और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की मदद से संयुक्त अभियान शुरू किया।

तलाशी अभियान अभी भी जारी

अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध आतंकवादियों को निचले पंगाई इलाके की ओर बढ़ते देखा गया। उन्होंने बताया कि तलाश अभियान जारी है, लेकिन संदिग्धों का पता फिलहाल नहीं लगा है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने मंगलवार की सुबह पुंछ के सुरनकोट इलाके के सनाई, जंगल, पट्टन और आसपास के गांवों तथा किश्तवाड़ जिले के द्राबशल्ला इलाके के बांगर-सरूर जंगल में तलाश अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि डोडा के देसा और आसपास के जंगलों तथा राजौरी जिले के लाम और नौशेरा सेक्टर के सीमावर्ती इलाकों में भी तलाश अभियान शुरू किया गया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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