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इंडियन एयरफोर्स के पीछे चली नेवी, आसमान से लेकर समुद्र तक तबाही मचाने को खरीदी जा रही ये मिसाइल!

Rafael Ice Breaker stealth air-launched cruise missile: IAF ने आइस ब्रेकर को शामिल करने की मंजूरी दे दी है, ऐसे में नौसेना के प्लानर्स को सी हॉक्स को हल्के प्लेटफॉर्म के लिए डिजाइन की गई एक आधुनिक, स्टील्थ क्रूज मिसाइल से लैस करने का एक नया मौका दिख रहा है। राफेल ने आइस ब्रेकर को खास तौर पर हेलीकॉप्टरों, छोटे लड़ाकू विमानों और हल्के विमानों के लिए डिजाइन किया है

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इंडियन एयरफोर्स के पीछे चली नेवी, आसमान से लेकर समुद्र तक तबाही मचाने को खरीदी जा रही ये मिसाइल!

Indian Air Force/ Navy News: इंडियन एयर फोर्स द्वारा राफेल की आइस ब्रेकर स्टील्थ एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल (Rafael Ice Breaker stealth air-launched cruise missile) की खरीद को हरी झंडी देने के बाद, भारत की नौसेना एविएशन विंग भी अपने MH-60R 'रोमियो' सी हॉक हेलीकॉप्टरों (MH-60R Romeo Sea Hawk helicopters) के बेड़े के लिए इस इजराइली हथियार का मूल्यांकन कर रही है। इस कदम से भारतीय नौसेना की जहाजों का शिकार करने और बेड़े से दूर से ऑपरेट होने वाले रोटरी-विंग प्लेटफॉर्म से समुद्री हमले की क्षमता में काफी सुधार हो सकता है।

idrw.org की रिपोर्ट के अनुसार, जब भारतीय नौसेना ने 24 MH-60R सी हॉक्स का ऑर्डर दिया था, तो हेलीकॉप्टरों को हेलफायर मिसाइलों और Mk-54 हल्के टॉरपीडो जैसे स्टैंडर्ड हथियारों के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया गया था। हालांकि, कोंग्सबर्ग नेवल स्ट्राइक मिसाइल (NSM) दुनिया भर में MH-60R के साथ पहले से ही इंटीग्रेटेड थी और अमेरिकी नौसेना के साथ सेवा में है, लेकिन भारतीय नौसेना ने अपने रोमियो के लिए NSM नहीं खरीदा। NSM, जिसका वजन लगभग 407 किलोग्राम है, यह हेलीकॉप्टर से ले जाने और लंबी दूरी के एंटी-शिप हमले के लिए ऑप्टिमाइज्ड है, लेकिन इसे कभी भी भारतीय नौसेना सेवा में शामिल नहीं किया गया।

IAF के पीछे चली नेवी

अब जब IAF ने आइस ब्रेकर को शामिल करने की मंजूरी दे दी है, तो नौसेना के प्लानर्स को सी हॉक्स को हल्के प्लेटफॉर्म के लिए डिजाइन की गई एक आधुनिक, स्टील्थ क्रूज मिसाइल से लैस करने का एक नया मौका दिख रहा है। राफेल ने आइस ब्रेकर को खास तौर पर हेलीकॉप्टरों, छोटे लड़ाकू विमानों और हल्के विमानों के लिए डिजाइन किया है, जिससे यह MH-60R के लिए तकनीकी रूप से एक सही विकल्प बन जाता है। लगभग 400 किलोग्राम वजन वाली आइस ब्रेकर सी हॉक के पेलोड क्षमता के दायरे में आती है, जो आराम से 400 किलोग्राम-क्लास के गोला-बारूद ले जाने में सक्षम है।

इसके विपरीत, DRDO की नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज, जिसे मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों के लिए विकसित किया गया है, इसको हेलीकॉप्टर ऑपरेशन के लिए बहुत भारी माना जाता है, जिसका वजन 600 किलोग्राम से ज्यादा है। हालांकि यह मिसाइल लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता प्रदान करती है, लेकिन इसके वजन और इंटीग्रेशन की जरूरतों के कारण यह रोटरी-विंग लॉन्च के लिए उपयुक्त नहीं है। नतीजतन, नौसेना अपने समुद्री हेलीकॉप्टरों को हथियार देने के लिए हल्के स्वदेशी और विदेशी विकल्पों के मिश्रण की तलाश कर रही है।

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ऐसा ही एक स्वदेशी विकल्प DRDO की नेवल एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज है, जिसकी रेंज लगभग 50 किलोमीटर है और इसका वजन लगभग 380 किलोग्राम है। हालांकि, NASM-SR हेलीकॉप्टर ऑपरेशन के लिए ऑप्टिमाइज्ड है और यह कम से मध्यम दूरी के समुद्री हमले के लिए एक कॉम्पैक्ट, उच्च मारक क्षमता वाला समाधान प्रदान करती है। भविष्य के सी हॉक वेपन्स पैकेज में, आइस ब्रेकर NASM–SR का पूरक हो सकता है, जिससे भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टरों को स्टैंडऑफ स्ट्राइक क्षमता और कम दूरी का हाई-रिस्पॉन्स एंटी-शिप विकल्प दोनों मिलेंगे।

क्या है राफेल की इस मिसाइल की खासियत?

आइस ब्रेकर कई एडवांस्ड फीचर्स के साथ आती है जो नौसैनिक एविएशन के लिए आकर्षक हैं। यह मिसाइल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित टारगेट रिकग्निशन के साथ इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर का उपयोग करती है, जिससे जटिल समुद्री वातावरण में ऑटोनॉमस टारगेट हासिल करना संभव होता है। इसका लो-ऑब्जर्वेबल डिजEइन और सी-स्किमिंग फ्लाइट प्रोफाइल इसे पता लगाना और रोकना मुश्किल बनाता है, जबकि इसकी लंबी रेंज हेलीकॉप्टरों को दुश्मन के एयर डिफेंस घेरे से काफी बाहर से लॉन्च करने की अनुमति देती है।

भारतीय नौसेना के लिए, MH-60R को एक स्टील्थी, लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल से लैस करने से हेलीकॉप्टर की भूमिका एंटी-सबमरीन युद्ध और सतह की निगरानी से बढ़कर एक शक्तिशाली जहाज-रोधी प्लेटफॉर्म के रूप में बड़े स्तर पर बढ़ जाएगी। फ्रंटलाइन डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट से संचालित होने वाले सी हॉक टास्क फोर्स से सैकड़ों किलोमीटर दूर दुश्मन के सतह युद्धपोतों को निशाना बना सकते हैं, जिससे वितरित समुद्री स्ट्राइक क्षमता की एक शक्तिशाली परत जुड़ जाएगी।

IAF पहले ही आइस ब्रेकर को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां अब नौसेना की दिलचस्पी भी जोर पकड़ रही है। अगर मंजूरी मिल जाती है, तो आइस ब्रेकर भारत के MH-60R बेड़े के लिए प्राथमिक लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल बन सकती है, जो NSM की खरीद न होने से पैदा हुए क्षमता के अंतर को भरेगी और भारी एयर-लॉन्च एंटी-शिप हथियारों के लिए एक हल्का, हेलीकॉप्टर-अनुकूल विकल्प प्रदान करेगी।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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