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दुश्मन देश बहुत तेजी से बना रहा J-20, J-35 फाइटर जेट, 1300 जेट बनने की संभावना! इंडियन एयरफोर्स पर क्या पड़ेगा असर, जानें- IAF की ताकत?

IAF News: भारत ने अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट की जरूरत पर काफी चर्चा की। इससे भी बड़ी बात ये कि भारतीय सरकार रूसी ऑफर को नजरअंदाज करती दिख रही है, जबकि IAF ने बढ़ते ऑपरेशनल गैप को भरने के लिए एक अंतरिम स्टील्थ फाइटर के दो से तीन स्क्वाड्रन की जरूरत बताई है। उधर चीन तेजी से बेड़े में फाइटर जेट जोड़ रहा है।

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IAF की ताकत कितनी है, जानते हैं

Indian Air Force: मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम के तहत खरीद शुरू करने के लगभग आठ साल बाद, रक्षा मंत्रालय (MoD) आखिरकार भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 114 राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए ₹3.25 लाख करोड़ ($36B) की डील साइन कर चुका है। मोटे तौर पर कहें तो, भारत के पास अभी लगभग 600 फाइटर एयरक्राफ्ट हैं और अब वह 114 और खरीदने वाला है।

लेकिन दुश्मन देश,चीन तेजी से आगे भाग रहा

इसके उलट, सिर्फ 2025 में, पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) ने अनुमान के मुताबिक 120 J-20A और J-20S हेवी स्टील्थ फाइटर शामिल किए हैं। (J-20A, J-20 का डबल-सीट वाला वेरिएंट है।) 2025 में ही, PLAAF ने 100 से 170 और फाइटर शामिल किए, जिनमें J-16/D, J-15/T/DH/DT और J-10A/B/C शामिल हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो PLAAF ने एक ही साल में अपनी इन्वेंट्री में 300 तक हेवी स्टील्थ और नॉन-स्टील्थ फाइटर शामिल किए होंगे।

रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) के एक अनुमान के मुताबिक, 2030 तक PLAAF के पास लगभग 1,000 J-20A/S फाइटर और 900 J-16 विमान सर्विस में होंगे।

अगस्त 2022 में बनाए गए J-20 की संख्या लगभग 150 से बढ़कर नवंबर 2023 में 208 हो गई। 2023 में प्रोडक्शन रेट शायद 100 एयरक्राफ्ट प्रति वर्ष तक पहुंच गया था और तब से यह लगभग 120 एयरक्राफ्ट सालाना पर स्थिर हो गया है। अनुमानित 1,000 J-20A/S स्टेल्थ फाइटर्स के अलावा, PLAAF कई सौ लैंड-बेस्ड J-35 वेरिएंट भी शामिल कर सकता है।

माना जा रहा है कि J-35 का शुरुआती प्रोडक्शन कम मात्रा में हो रहा है, लेकिन आने वाले सालों में इसके प्रोडक्शन में तेजी आने की उम्मीद है। J-20 के प्रोडक्शन में तेजी से हुई बढ़ोतरी को देखते हुए, 2030 तक 200 से 300 J-35 ऑपरेशनल हो सकते हैं।

खास बात यह है कि J-35 में J-20 के लिए बनाए गए सिस्टम से लिए गए बहुत काबिल सेंसर और हथियार होंगे।

भारत कर रहा लापरवाही?

इस बढ़ते खतरे को देखते हुए भी भारत ने अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट की जरूरत पर काफी चर्चा की। इससे भी बड़ी बात ये कि भारतीय सरकार रूसी ऑफर को नजरअंदाज करती दिख रही है, जबकि IAF ने बढ़ते ऑपरेशनल गैप को भरने के लिए एक अंतरिम स्टील्थ फाइटर के दो से तीन स्क्वाड्रन की जरूरत बताई है।

EURASIAN TIMES की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के ऑफर को दरकिनार करने के पीछे जिन संभावित कारणों पर प्रकाश डाला गया, उनमें भारतीय कॉर्पोरेट्स, नौकरशाही और राजनीतिक नेतृत्व में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) और यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स (MIC) शामिल हो सकते हैं। अब चाहे वजह जो भी हो, लेकिन इंडियन एयरफोर्स को जल्द ज्यादा फाइटर जेट्स की जरूरत है और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि खतरा चीन ही नहीं बिलकुल नजदीक बैठा पाकिस्तान भी है और अब बांग्लादेश भी आवाज उठाता दिख जाता है।

हथियार खरीदने से ToT को अलग करने की तत्काल जरूरत

IAF की स्क्वाड्रन ताकत में लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट आई है और इसका मुख्य कारण 42 से 29 स्क्वाड्रन तक पर आजाना है। तेजस फाइटर और इसके बाद के वेरिएंट, जिसमें तेजस Mk-1A और तेजस Mk-2 शामिल हैं इनकी डिलीवरी में लगातार देरी से स्क्वाड्रन में कमी आ रही है।

सवाल मेक इन इंडिया पर नहीं, लेकिन देरी

इस मामले के दूसरे पहलू पर ध्यान दें तो डिफेंस से जुड़े इक्विपमेंट के लिए मेक इन इंडिया की जरूरत या अर्जेंसी पर कोई सवाल नहीं उठाता। लेकिन जब मेक इन इंडिया की टाइमलाइन पूरी नहीं हो पा रही हैं, तो दिक्कत तब शुरू होती है और इसलिए दूसरे देशों से जल्द डिलीवरी के लिए जेट्स खरीदने होते हैं।

इंडियन एयरफोर्स को कौनसे नए जेट मिलेंगे?

भारत का एयर डोमिनेंस और डिफेंस सेक्टर एक बड़े बदलाव की कगार पर है, जिसमें चार एडवांस्ड स्वदेशी एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट्स से 2035 तक इंडियन एयर फोर्स (IAF) और नेवी की क्षमताओं को फिर से परिभाषित करने की उम्मीद है। इनमें एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), तेजस Mk-2, ट्विन इंजन डेक बेस्ड फाइटर (TEDBF), और नेत्रा Mk-2 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्लेटफॉर्म शामिल हैं। ये सभी डिफेंस प्रोडक्शन और अगली पीढ़ी की एयर पावर में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

AMCA, भारत का स्टील्थ पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट होगा। उम्मीद है कि यह एयरक्राफ्ट 2030 और 2032 के बीच अपनी पहली उड़ान भरेगा और 2035 तक इसे शामिल कर लिया जाएगा। वहीं, तेजस Mk-2 की पहली उड़ान 2026 में होने का लक्ष्य है और 2028 तक इसे शामिल किए जाने की उम्मीद है, जिससे यह IAF के भविष्य के बेड़े का एक अहम हिस्सा बन जाएगा।

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 Nitin Arora
Nitin Arora author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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