संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथानेनी हरीश ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, गाजा में शांति और फलस्तीन मुद्दे पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत यूएनएससी में यह बैठक बुलाने के लिए रूस का धन्यवाद करता है। उन्होंने कहा कि यह चर्चा 13 अक्तूबर 2025 को शर्म अल-शेख में हुए गाजा शांति शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में हो रही है, जिसमें भारत ने भाग लिया था और ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत किया था।
भारत ने ट्रंप की भूमिका की सरहाना की
हरीश ने कहा, "भारत को उम्मीद है कि इस कूटनीतिक पहल से क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।" उन्होंने अमेरिका और विशेष रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सराहना की, जिन्होंने इस समझौते को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मिस्र और कतर के योगदान की भी प्रशंसा की। भारत का मानना है कि संवाद, कूटनीति और दो-राष्ट्र समाधान ही शांति का मार्ग हैं। उन्होंने जोर दिया कि सभी पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करें और किसी भी एकतरफा कदम से बचें।
इजरायल-हमास के बीच युद्धविराम रहे लागू
पर्वथानेनी हरीश ने कहा कि भारत पूरे मध्य पूर्व में शांति की वकालत करता है। हमें उम्मीद है कि युद्धविरामा लागू रहेगा। बातचीत और संवाद के जरिए ही किसी भी मसले का हल निकालना जरूरी है। वहीं, फलिस्तीनी लोगों की स्वतंत्रता के साथ भारत खड़ा है। बता दें कि भारत टू स्टेट थ्योरी की वकालत करता है।
पर्वथानेनी हरीश ने आगे कहा कि इस संघर्ष के दौरान भारत ने फिलिस्तीनियों के लिए 17 करोड़ डॉलर से अधिक की सहायता प्रदान की है, जिसमें 135 मीट्रिक टन दवाइयाँ और अन्य सामग्री शामिल है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समर्थन के बिना फ़िलिस्तीनी लोग अपने जीवन का पुनर्निर्माण नहीं कर सकते। वहीं, भारत ने यमन में मौजूद भारतीय नागिरिकों की सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यमन में भी युद्धविराम और शांति की जरूरत है।
