Wars of Future: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और भारतीय वायु सेना की पश्चिमी वायु कमान के पूर्व प्रमुख एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा ने कहा है कि भविष्य के युद्ध अब केवल कल की बात नहीं हैं, बल्कि वे उन्नत तकनीक, सटीक योजना और स्वदेशी क्षमताओं के दम पर आज ही लड़े जा रहे हैं। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, जितेंद्र मिश्रा ने अपने नए पद पर अधिक टिप्पणी करने से परहेज किया, क्योंकि उन्होंने अभी औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने भारतीय वायु सेना द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' और भारत की मजबूत होती रक्षा प्रणाली पर खुलकर बात की।
ऑपरेशन सिंदूर: वर्षों की तैयारी और स्वदेशी ताकत
30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए एयर मार्शल मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर को सिर्फ एक सैन्य अभियान न मानकर, भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायु सेना के जवानों के वर्षों के परिश्रम का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन देश की रणनीतिक सोच और तकनीकी प्रगति का प्रतीक है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भविष्य की तकनीक पर जोर देते हुए उन्होंने एक दैनिक जीवन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करते ही उपग्रह प्रणालियां तुरंत बैंकिंग नेटवर्क से जुड़ जाती हैं, ठीक उसी तरह भविष्य के युद्ध भी ऐसी ही आपस में जुड़ी तकनीकों पर निर्भर करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश एआई और तकनीक की इस तेज गति के साथ नहीं चल पाएंगे, वे कुछ ही वर्षों में पीछे छूट जाएंगे।
स्वदेशी सुरक्षा ढांचा और 300 किमी दूर सटीक निशाना
एयर मार्शल मिश्रा ने बताया कि भारत के पास 250 से 300 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों पर महज दो मीटर की सटीकता के साथ हमला करने की क्षमता है। उन्होंने भारत की स्वदेशी क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 15-20 साल पहले तक भारतीय वायु सेना के अधिकांश रडार रूस, अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों से आते थे। विदेशी विक्रेताओं पर निर्भर रहने से संवेदनशील परिचालन डेटा साझा करने का जोखिम था। इसे खत्म करने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों और वायु सेना ने मिलकर इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) विकसित किया, जिसे तैयार करने में लगभग 15 साल लगे।
- एक एकीकृत नेटवर्क: आज यह स्वदेशी नेटवर्क देश भर के सैन्य और नागरिक रडार को आपस में जोड़ता है और अब इसमें नौसेना की संपत्तियों को भी शामिल किया जा रहा है।
- भूमिगत कमान केंद्र: 7 से 8 भूमिगत परिचालन केंद्रों (underground operational centres) के माध्यम से राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र की चौबीसों घंटे निगरानी की जाती है।
- सिविलियन रडार का एकीकरण: दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों के रडार डेटा को भी एक समान प्रारूप (common format) में बदलकर एकीकृत किया गया है।
बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का अंतर
बालाकोट हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना करते हुए मिश्रा ने स्पष्ट किया कि संसाधन या क्षमताएं बालाकोट के समय भी मौजूद थीं, लेकिन अंतर सिर्फ अलग-अलग चरणों में चुने गए रणनीतिक विकल्पों का था। उन्होंने उरी हमले के बाद से सीमा पार खतरों के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया में आए क्रमिक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' को इस प्रक्रिया का अंतिम चरण नहीं माना जाना चाहिए; भारत के आसमान की सुरक्षा एक सतत 24x7 चलने वाला मिशन है।
हवाई हमलों के प्रभाव पर बोलते हुए उन्होंने उपग्रह छवियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर और मुरीद में नौ इमारतों पर किए गए हमलों की तस्वीरों ने विनाशकारी प्रभावशीलता और सटीकता को साबित किया है।
एस-400 और ब्रह्मोस का वैश्विक रिकॉर्ड
लॉन्ग-रेंज अटैक क्षमताओं की चर्चा करते हुए सेवानिवृत्त एयर मार्शल ने दो प्रमुख हथियारों का उल्लेख किया। S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, इसके माध्यम से 314 किलोमीटर की दूरी पर एक विमान को मार गिराना विश्व रिकॉर्ड के बेहद करीब की उपलब्धि थी। दूसरा ब्रह्मोस मिसाइल, जिसे दुनिया की एकमात्र ऑपरेशनल सुपरसोनिक एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी मदद से सरगोधा और रहीम यार खान जैसे ठिकानों को 200 किलोमीटर से अधिक की दूरी से भी निशाना बनाया जा सकता है।
