Gilgit Baltistan Assembly Polls: भारत ने शुक्रवार को 7 जून को तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान असेंबली के लिए 'आम चुनाव' कराने के पाकिस्तान के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। भारत सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि गिलगित-बाल्टिस्तान समेत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न अंग हैं।
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की ऐसी कोई भी कोशिश उसके अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और स्वतंत्रता के हनन जैसे जमीनी मुद्दों को छिपा नहीं सकती हैं।
अवैध कब्जा खाली करे पाकिस्तान
भारत ने पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले इलाकों का स्टेटस बदलने की किसी भी कोशिश को खारिज कर दिया। साथ ही सरकार ने रेखांकित किया कि पाकिस्तान की ऐसी हरकतें इस हकीकत को नहीं बदल सकती हैं कि उसने भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा कर रखा है, और उसे इन क्षेत्रों को तुरंत खाली करना होगा।
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मानवाधिकार कार्यकर्ता ने PM मोदी से मांगी मदद
इस बीच, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoJK) के मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पीओजेके के लोगों की तरफ से दखल देने की अपील की। साथ ही उन्होंने क्षेत्र के निवासियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर बढ़ रहे अत्याचारों और मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
मिर्जा के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्ज़े वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में राजनीतिक और नागरिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं को गिरफ्तारियों, हिरासत और भारी दमन का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि 'गिलगित-बाल्टिस्तान अवामी एक्शन कमेटी' के कई नेताओं और सदस्यों को सिर्फ इसलिए जेल में डाल दिया गया है ताकि राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक अधिकारों की उनकी मांगों को दबाया जा सके।
सनद रहे कि इस समय पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। साल 1947 से पाकिस्तान के कड़े नियंत्रण और वहां के लोगों के ब्रेनवाश के बावजूद इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश और नाराजगी है।
