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Budget 2026: वित्त मंत्री ने किस देश को क्या दिया? किसकी सहायता में हुआ इजाफा, किस पर चली कैंची

Budget 2026: इस बार बजट के आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि सरकार ने कुछ देशों और क्षेत्रों पर भरोसा बढ़ाया है,जबकि कुछ सहयोगी देशों के लिए मदद में उल्लेखनीय कटौती की गई है।लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर हो रही है।

बजट 2026 में देशों की मदद के लिए क्या?

बजट 2026 में देशों की मदद के लिए क्या?

Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रिकॉर्ड बनाते हुए नौवीं बार वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया है। इसमें उन्होंने न सिर्फ घरेलू प्राथमिकताओं को सामने रखा,बल्कि इसके जरिए भारत की विदेश नीति के संकेत भी दिए। बजट दस्तावेजों में पड़ोसी देशों से लेकर दूरस्थ सहयोगी देशों तक को दी जाने वाली वित्तीय सहायता का पूरा खाका सामने आया है। इस बार बजट के आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि सरकार ने कुछ देशों और क्षेत्रों पर भरोसा बढ़ाया है,जबकि कुछ सहयोगी देशों के लिए मदद में उल्लेखनीय कटौती की गई है।लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर हो रही है। इस बार बजट में विदेश मंत्रालय के लिए 22119 करोड़ रुपयों का आवंटन किया गया है। इसमें से 5685 करोड़ रुपये अन्य देशों की सहायता मद के लिए हैं।

इस बजट में चाबहार बंदरगाह के लिए किसी भी तरह के आवंटन का उल्लेख नहीं किया गया है। जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये रखे गए थे। बजट दस्तावेज में इस मद को खाली छोड़े जाने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या भारत इस रणनीतिक परियोजना को लेकर अपने रुख में बदलाव कर रहा है।

इन देशों के लिए भारत ने बढ़ाई मदद

  • बजट के अनुसार, मंगोलिया के लिए सहायता राशि में सबसे तेज उछाल देखा गया है। पिछले वर्ष 5 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, यानी करीब 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी।
  • लैटिन अमेरिकी देशों के लिए आवंटन को दोगुना करते हुए 60 करोड़ से बढ़ाकर 120 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो दक्षिण अमेरिका में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता की ओर इशारा करता है।
  • अफगानिस्तान को मिलने वाली सहायता 100 करोड़ से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये कर दी गई है, जबकि श्रीलंका के लिए आवंटन 300 करोड़ से बढ़कर 400 करोड़ रुपये हो गया है।
  • पड़ोसी देशों में नेपाल को 700 करोड़ से बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये और मॉरीशस को 500 करोड़ से बढ़ाकर 550 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।
  • भूटान को मिलने वाली मदद में राशि के लिहाज से सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बार भूटान के लिए 2,288.56 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल से 138.56 करोड़ रुपये अधिक है।
बजट 2026-27

बजट 2026-27

इन देशों पर चली कटौती की कैंची

बजट 2026-27 में सबसे बड़ी कटौती बांग्लादेश के लिए की गई है। उसकी सहायता राशि 120 करोड़ से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दी गई है, यानी 50 प्रतिशत की सीधी कटौती। अन्य विकासशील देशों के लिए आवंटन भी 150 करोड़ से घटाकर 80 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

म्यांमार को दी जाने वाली सहायता 350 करोड़ से घटकर 300 करोड़ रुपये रह गई है, जबकि मालदीव के लिए बजट 600 करोड़ से घटाकर 550 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यूरेशियाई देशों के लिए भी मामूली कटौती की गई है, जहां आवंटन 40 करोड़ से घटकर 38 करोड़ रुपये हो गया है।

वहीं, अफ्रीकी देशों के लिए 225 करोड़ रुपये और सेशेल्स के लिए 19 करोड़ रुपये की सहायता राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये आवंटन पिछले वर्ष के स्तर पर ही बरकरार रखे गए हैं।

बजट 2026

बजट 2026

चाबहार बंदरगाह पर बजट में कुछ नहीं

इस बजट की सबसे चौंकाने वाली बात ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर सामने आई है। जहां 2025-26 में इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे,वहीं 2026-27 के बजट में इस मद को खाली छोड़ दिया गया है। चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाएं तेज रही हैं। अमेरिका की ओर से ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी के बाद इस परियोजना पर दबाव की बातें सामने आई थीं।

अब बजट में चाबहार के लिए किसी भी तरह का आवंटन न होना इन अटकलों को और हवा दे रहा है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह फैसला भू-राजनीतिक दबावों और बदलते वैश्विक समीकरणों से जुड़ा हो सकता है, हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

आपदा राहत में भारत की मानवीय भूमिका बरकरार

विदेशों में आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता के लिए भारत ने इस बार बजट में बढ़ोतरी की है। वर्ष 2025-26 में इस मद के तहत 64 करोड़ रुपये रखे गए थे, जिन्हें 2026-27 में बढ़ाकर 80 करोड़ रुपये कर दिया गया है। बीते साल इसी फंड के जरिए भारत ने श्रीलंका को दित्वाह चक्रवात से उबरने में मदद की थी। इसके अलावा म्यांमार और अफगानिस्तान में आए भूकंप के बाद राहत कार्यों में भी भारत की सहायता पहुंचाई गई थी। कई देशों को आपदा के समय राहत सामग्री और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए गए थे। कटौती और बदलावों के बीच एक बात साफ है कि भारत ने आपदा राहत के मोर्चे पर अपनी प्रतिबद्धता मजबूत रखी है। बढ़े हुए फंड के जरिए भविष्य में भी प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे देशों को राहत सामग्री और जरूरी मदद उपलब्ध कराई जा सकेगी।

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शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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