Mission Chandrayaan-3: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को गुरुवार को अमेरिकी वैमानिकी और अंतरिक्षयानिकी संस्थान (AIAA) द्वारा 'चंद्रयान-3 मिशन' के लिए 2026 के 'गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स' पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने एआईएए सम्मेलन में यह पुरस्कार प्राप्त किया।
चंद्रयान ने की थी ऐतिहासिक लैंडिंग
प्रशस्ति पत्र के अनुसार, इसरो को यह पुरस्कार ''चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के निकट 'चंद्रयान-3' की ऐतिहासिक लैंडिंग के लिए दिया गया है, जिससे चंद्रमा की हमारी समझ बेहतर करने में मदद मिली है।'' क्वात्रा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि एआईएए द्वारा प्रदत्त प्रतिष्ठित 2026 गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स पुरस्कार के लिए इसरो और चंद्रयान 3 टीम को बधाई।
क्या कुछ बोले विनय क्वात्रा?
उन्होंने कहा, ''इसरो की ओर से यह पुरस्कार स्वीकार करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतरिक्ष विजन 2047 तथा आगामी गहन अंतरिक्ष अन्वेषण एवं मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन तथा भारत में बढ़ते वाणिज्यिक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को रेखांकित करना मेरे लिए सम्मान की बात है।''
चंद्रयान-3 मिशन
इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन को 14 जुलाई, 2023 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया था। इसके बाद 23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा था। इसके साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। चंद्रयान-3 मिशन में तीन प्रमुख हिस्से शामिल थे, जिनमें प्रोपल्शन मॉड्यूल, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर शामिल था। बता दें कि प्रोपल्शन मॉड्यूल ने लैंडर को चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचाया था। विक्रम लैंडर ने चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी और प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर घूमकर वैज्ञानिक प्रयोग किए।
इस मिशन का उद्देश्य सिर्फ लैंडिंग करना नहीं था, बल्कि यह साबित करना भी था कि भारत कठिन अंतरिक्ष मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है और इसरो ने यह कमाल करके दिखाया भी।
