कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को कहा कि INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगा है, लेकिन अभी तक राष्ट्रपति भवन से कोई जवाब नहीं मिला है। वेणुगोपाल ने कहा कि इस संबंध में पहला अनुरोध दो अक्टूबर को भेजा गया था। इसके बाद राष्ट्रपति भवन कार्यालय ने बैठक में शामिल होने वाले नेताओं के नाम मांगे थे।
उन्होंने कहा कि पांच अक्टूबर को नेताओं के नाम के साथ दोबारा अनुरोध भेजा गया और सात, आठ या नौ अक्टूबर को मुलाकात का समय देने का आग्रह किया गया। वेणुगोपाल ने कहा, 'अब तक हमें कोई जवाब नहीं मिला है। हम कल तक इंतजार करेंगे।'
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मतदाताओं के अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह 'करो या मरो' की लड़ाई
कांग्रेस नेता ने भाजपा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारतीय लोकतंत्र में 'अराजकता पैदा करने' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'वे भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने वाले हैं और हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां हैं।' वेणुगोपाल ने कहा कि देश के मतदाताओं के अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह 'करो या मरो' की लड़ाई है।
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राष्ट्रपति से मिलने वाले संभावित चेहरों में ये हैं-
राहुल गांधी
मल्लिकार्जुन खड़गे
ममता बनर्जी
अखिलेश यादव
तेजस्वी यादव
(पवार नहीं तो सुप्रिया सुले के लिए प्रयास)
एम ए बेबी, सीपीएम
'संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना नहीं'
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच, 40 से ज्यादा पूर्व जजों ने चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के कथित प्रयासों पर गंभीर चिंता जताते हुए एक खुला पत्र लिखा।पूर्व जजों ने कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के लगातार 'वोट चोरी' जैसे आरोप लगाना और संवैधानिक संस्थाओं को 'चोर' या 'समझौता करने वाला' बताना लोकतंत्र में जनता के भरोसे को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा, 'संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना नहीं।'
पूर्व जजों ने SIR का किया बचाव
42 जजों ने खुले पत्र में कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना उचित नहीं है। उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह मतदाता सूचियों को स्वच्छ और सटीक बनाने के मकसद से कानून के तहत की जाने वाली एक प्रक्रिया है।
