Fibre Optic Drone: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना की निगरानी क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि सामने आई है। आईआईटी जम्मू ने सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक अत्याधुनिक ड्रोन विकसित किया, जो पारंपरिक रेडियो फ्रीक्वेंसी की बजाय, ऑप्टिकल फाइबर तकनीक पर काम करता है।
दुश्मन की पकड़ से रहेगा दूर
इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी अभेद्य सुरक्षा प्रणाली है। मिशन के दौरान, दुश्मन न तो इसके सिग्नल को ट्रैक कर सकता है और न ही इसे जैम कर सकता है। यही वजह है कि यह ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे चुनौतीपूर्ण माहौल में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।
100 फीट की ऊंचाई से सटीक तस्वीरें लेने में सक्षम
फिलहाल इसकी शुरुआती टेस्टिंग आईआईटी जम्मू परिसर में लगभग 100 फीट की ऊंचाई तक की गई है। परीक्षण के दौरान यह ड्रोन करीब 3 किलोमीटर के दायरे में निगरानी करने में सक्षम पाया गया। इसमें लगे हाई-टेक कैमरे दूरदराज के इलाकों की सटीक तस्वीरें और अहम जानकारी जुटाने में सक्षम हैं।
ड्रोन की एक और बड़ी विशेषता इसकी उन्नत पावर प्रणाली है। इसे बैटरी के साथ-साथ ऑप्टिकल फाइबर के जरिए भी ऊर्जा दी जा सकती है, जिससे यह लगातार 24 घंटे तक हवा में रहकर निगरानी कर सकता है। भविष्य में इसकी ऑपरेशनल क्षमता को 2–3 किलोमीटर या उससे अधिक तक बढ़ाने की योजना है।
तकनीकी जांच संपन्न
इस ड्रोन की कई चरणों में तकनीकी जांच पूरी हो चुकी है और शुरुआती नतीजे बेहद सकारात्मक रहे हैं। अब इसको सौंप दिया गया है, जहां सेना अपने ऑपरेशनल मानकों के अनुसार इसका परीक्षण कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद यह ड्रोन भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे सीमा पार की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना आसान होगा और संवेदनशील क्षेत्रों में बिना किसी जोखिम के लगातार निगरानी संभव हो सकेगी।
