बिहार की धरती से बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) ने बड़ा ऐलान कर दिया और इशारों ही इशारों में अपने इरादे भी जाहिर कर दिए हैं। बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह में शामिल होने के लिए भागलपुर पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर राजपूत समाज भार बन चुका है तो एक बार साफ-साफ कर दिया जाए, चाहे वो 2027 हो या फिर 2029। बृजभूषण शरण सिंह यहां यूपी विधानसभा चुनाव 2027 और लोकसभा चुनाव 2029 की ओर इशारा करते हुए अपने दबदबे की बात कर रहे थे। ट
बृजभूषण शरण सिंह ने दे दिया बड़ा संदेश
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी करीब एक साल का समय बाकी है, लेकिन उससे पहले ही सियासी हलचल तेज होने लगी है। पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने क्षत्रिय समाज को संगठित करने की मुहिम शुरू कर दी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के ठाकुर नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि सरकारों में उनकी कोई ठोस भागीदारी नजर नहीं आती। अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने सीधा संदेश दिया कि आज की राजनीतिक व्यवस्था में उनके समाज की उपस्थिति को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, अगर किसी को लगता है कि अब उनकी जरूरत नहीं है, तो खुलकर कह दिया जाए—चाहे 2027 हो या 2029, तब पता चल जाएगा कि उनकी अहमियत कितनी है। उनका कहना था कि अब मनाने का दौर खत्म हो चुका है और समाज को अपनी ताकत पहचानकर उसे सामने लाना होगा।
राजपूत समाज से अपील
बृजभूषण शरण सिंह ने समुदाय के भीतर आत्ममंथन की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि बीते समय में चुप रहने की वजह से ही समाज हाशिये पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि जब-जब दबाव पड़ा, तब-तब चुप्पी साध ली गई, जिसका नतीजा यह हुआ कि आज महत्व कम हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समाज अपने ऐतिहासिक नायकों को वह सम्मान नहीं दिला सका, जिसके वे हकदार थे।उन्होंने वीर कुँवर सिंह, महाराजा देवी बख्श सिंह, रानी लक्ष्मीबाई और बिरसा मुंडा जैसी महान शख्सियतों का जिक्र करते हुए कहा था कि उनकी विरासत को अटल पहचान नहीं मिल पाई।
