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टीना डाबी की बहन IAS रिया डाबी ने की गुपचुप शादी, इस IPS को चुना हमसफर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 19, 2023, 08:46 AM IST

IAS Riya Dabi Marriage: आईएएस अधिकारी रिया डाबी और आईपीएस मनीष कुमार की शादी की पुष्टि गृह मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन से हुई। जानकारी के मुताबिक, दोनों ने बीते महीने अप्रैल में कोर्ट मैरिज की थी। यह शादी बहुत ही गुपचुप तरीके से की गई थी।

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आईएएस अधिकारी रिया डाबी ने की शादी (तस्वीर- https://www.instagram.com/ria.dabi/)

IAS Riya Dabi Marriage: IAS अधिकारी और राजस्थान के जैसलमेर की कलेक्टर टीना डाबी की छोटी बहन IAS रिया डाबी ने शादी कर ली है। यह शादी बहुत ही गुपचुप तरीके से की गई है। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने महाराष्ट्र कैडर के IPS मनीष कुमार से बीते अप्रैल में कोर्ट मैरिज कर ली थी। इस शादी के बाद मनीष कुमार को महराष्ट्र से राजस्थान कैडर भेजा गया है।

दोनों की शादी की पुष्टि गृह मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन से हुई। मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए मनीष कुमार का ट्रांसफर राजस्थान कैडर में किया है। इसकी वजह राजस्थान में पदस्थ आईएएस अधिकारी रिया डाबी से उनकी शादी को बताया गया है।

बड़ी बहन टीना डाबी ने पिछले साल की थी शादी

बता दें, आईएएस अधिकारी रिया डाबी की बड़ी बहन टीना डाबी ने भी पिछले साल अप्रैल में शादी रचाई थी। उन्होंने 2013 बैच के आईएएस अधिकारी प्रदीप गवांडे को अपना हमसफर बनाया था। यह टीना डाबी की दूसरी शादी थी, जबकि प्रदीप गवांडे की पहली शादी थी। बता दें, टीना डाबी की पहली शादी कश्मीर के आईएएस अधिकारी अतहर आमित उल शफी खान से हुई थी, लेकिन यह रिश्ता लंबे समय तक नहीं चला ओर अगस्त, 2021 में दोनों के बीच तलाक हो गया था।

बड़ी बहन के नक्शे कदम पर छोटी

आईएएस अधिकारी रिया डाबी अपनी बड़ी बहन रिया डाबी को अपना आदर्श मानती हैं। टीना डाबी के आईएएस बनने के बाद टीना डाबी भी सिविल सेवा में आईं। बड़ी बहन ने नौकरशाह को अपना हमसफर बनाया, जिसके बाद छोटी ने भी एक नौकरशाह को अपना जीवनसाथी चुना।

UPSC में हासिल की थी 15वीं रैंक

बता दें, 2021 के संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के परीक्षा परिणाम में रिया डाबी ने ऑल इंडिया 15वीं रैंक हासिल कर धमाल मचा दिया था। इससे पहले 2016 में उनकी बड़ी बहन टीना डाबी ने यूपीएससी परीक्षा में देश में टॉप किया था। दोनों बहनों को राजस्थान कैडर मिला है। वर्तमान में टीना डाबी जैसलमेर की जिलाधिकारी हैं तो रिया अलवर में एसीएम के रूप में तैनात हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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