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हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड में जल प्रलय के बीच IAF हेलीकॉप्टर्स स्टैंड-बाई पर, MI-17 V5 ने कुल्लू में किया एरियल सर्वे

हिमाचल प्रदेश में राहत और बचाव कार्य के लिए पंजाब स्थित चंडीगढ़ और सरसावा एयरवेज को एक्टिवेट किया गया है और यहां मौजूद सभी तरह के हेलीकॉप्टर्स को तैयार रहने को कहा गया है।

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Rain and flood in Himachal pradesh

Indian Airforce: भारतीय वायुसेना ने हिमाचल प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए अपने सभी हेलीकॉप्टर असेट्स को स्टैंड-बाई पर रख दिया है। आज भारतीय वायुसेना के Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर ने कुल्लू वैली का जायजा लेने के लिए सरसावा एयरबेस से सौर्टी की। इस उड़ान के जरिए भारतीय वायु सेना इस पूरे इलाके का जायजा लेकर अपनी आगे की तैयारी कर रही है।

चंडीगढ़ और सरसावा एयरवेज सक्रिय

हिमाचल प्रदेश में राहत और बचाव कार्य के लिए पंजाब स्थित चंडीगढ़ और सरसावा एयरवेज को एक्टिवेट किया गया है और यहां मौजूद सभी तरह के हेलीकॉप्टर्स को तैयार रहने को कहा गया है। उत्तराखंड में बाढ़ के कहर के बीच लोगों की मदद करने के लिए भारतीय वायुसेना ने उत्तर प्रदेश के बरेली एयर बेस को भी एक्टिवेट किया है, साथ ही सरसावा से ही उत्तराखंड के लिए भी रेस्क्यू टीम को रवाना किया जा सकता है।

पंजाब में भी वायुसेना तैयार

पंजाब में भी भारतीय वायु सेना ने हेलीकॉप्टर्स के जरिए लोगों की मदद के लिए तैयारी कर रखी है, जिसके लिए चंडीगढ़, उधमपुर, सरसावा एयर बेस से उड़ान भरी जा सकती है। भारतीय वायु सेना सभी एजेंसी के साथ मिलकर अलग-अलग प्रदेशों में बाढ़ की स्थिति को मॉनिटर कर रही है और ज़रूरत पड़ते ही अपने असेट्स को इन इलाकों में रेस्क्यू के काम के लिए लगा सकती है।

चंडीगढ़ में चिनूक और सरसावा में Mi-17 और चीता हैलिकॉप्टर का बेस है। उत्तराखंड में भी रेड अलर्ट है ऐसे में सरसावा के साथ साथ बरेली एयर बेस को तैयार रखा गया है। बरेली में भारतीय वायुसेना के ALH मार्क 3 तैनात हैं। भारतीय वायुसेना के पास चंडीगढ़ में चिनूक, हिंडन में Mi 17 V5, उधमपुर में Mi-17 V5 और ALH यूनिट्स मौजूद है और जरूरत पड़ने पर इन सभी को वार्ड 10 इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशंस के लिए तैनात किया जा सकता है।

शिवानी शर्मा
शिवानी शर्माauthor

19 सालों के पत्रकारिता के अपने अनुभव में मैंने राजनीति, सामाजिक सरोकार और रक्षा से जुड़े पहलुओं पर काम किया है। सीमाओं पर देश के वीरों का शौर्य, आत्मनिर्भर होती भारत की सेनाओं का साहस और रक्षा मंत्रालय की हर हलचल के साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध को नज़दीक से देखा, समझा और रिपोर्ट किया है। विषमताओं को पार कर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 19,300 फीट पर दुनिया के सबसे ऊँचे पास पर पहुँचने वाली पहली पत्रकार होने का गौरव प्राप्त किया। Times Now नवभारत पर रक्षा क्षेत्र से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण खबरें लाना मेरी कोशिश है जो आपको सिर्फ सच बताएं।

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