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उम्मीद है कि प्रधानमंत्री को मणिपुर जाने का भी मिलेगा वक्त; कांग्रेस का तंज

पीएम मोदी ने शनिवार को वायनाड का दौरा किया तो कांग्रेस ने तीखा तंज कसते हुए कहा है कि उम्मीद है कि प्रधानमंत्री को मणिपुर जाने का भी समय मिलेगा। नरेंद्र मोदी ने वायनाड भूस्खल के बाद आज आपदा प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। आपको बताते हैं कांग्रेस ने क्या कहा।

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पीएम मोदी ने वायनाड का किया दौरा, तो कांग्रेस ने कसा तंज।

Congress on PM Modi: कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वायनाड गए हैं और उम्मीद है कि वह मणिपुर का दौरा करने के लिए भी समय निकालेंगे जो पिछले 15 महीनों से दर्द झेल रहा है। विपक्षी दल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मोदी केरल के भूस्खलन प्रभावित वायनाड के दौरे पर हैं।

मणिपुर का कब दौरा करेंगे पीएम मोदी?

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'यह अच्छी बात है कि ‘नॉन-बायोलॉजिकल’ प्रधानमंत्री आज वायनाड में हैं। यह एक विनाशकारी त्रासदी थी।' उन्होंने कहा, 'इसके बाद वह (मोदी) एक बार फिर युद्ध को रोकने के लिए यूक्रेन का दौरा करने वाले हैं। उम्मीद है कि उसके पहले वह मणिपुर का दौरा करने का समय और इच्छाशक्ति दोनों ही ढूंढ़ निकालेंगे। मणिपुर की जनता पिछले 15 महीनों से बहुत दुख, दर्द, और पीड़ा झेल रही है।'

मणिपुर के मुद्दे पर कांग्रेस ने पीएम को घेरा

कांग्रेस हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा न करने के लिए प्रधानमंत्री पर लगातार निशाना साधती रही है। मोदी ने शनिवार को उत्तरी केरल के वायनाड जिले के आपदा प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। वायनाड में विनाशकारी भूस्खलन के कारण 200 से अधिक लोगों की जान चली गई है।

शिविर में पीएम ने लोगों से की बातचीत

मोदी ने एक राहत शिविर का भी दौरा किया, जहां भारी भूस्खलन के कारण विस्थापित हुए कई लोग रह रहे हैं। उन्होंने घटना से प्रभावित कुछ लोगों से बातचीत की। इनमें दो बच्चे भी शामिल थे, जिन्होंने इस आपदा में अपने प्रियजनों को खो दिया। इस आपदा में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है। बाद में, प्रधानमंत्री ने दोपहर करीब ढाई बजे मेप्पाडी स्थित शिविर का दौरा किया और वहां करीब आधा घंटा बिताया तथा कुछ लोगों से बातचीत की।

टीवी चैनलों पर प्रसारित दृश्यों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने भूस्खलन प्रभावित लोगों से बात की, उनकी चिंताओं और जरूरतों को सुना तथा उन्हें सांत्वना देने की कोशिश की। मोदी ने सांत्वना देते हुए पीड़ितों के सिर और कंधों पर हाथ रखा। प्रभावित लोगों में से कई प्रधानमंत्री को अपनी आपबीती बताते हुए रोने लगे। कलपेट्टा में उतरने से पहले, प्रधानमंत्री ने भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से भूस्खलन प्रभावित चूरलमाला, मुंडक्कई और पुंचिरीमट्टम का हवाई सर्वेक्षण किया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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