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Himanta Biswa Sarma Video: असम सीएम को दुलारती- पुचकारती नजर आई बुजुर्ग महिला, बोले- जनता का आशीर्वाद

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 9, 2023, 09:08 AM IST

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा है- जनता का आशीर्वाद।

Himanta Biswa Sarma Viral Video: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपने तीखे बयानों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन एक राजनेता होने के साथ ही वह बेहद जमीनी इंसान भी हैं। जनता से कैसे मिलना है, उनके दुख-दर्द और तकलीफ कैसे सुननी है, इसे वह भलीभांति जानते हैं। आम जनता से एक आम इंसान की तरह उनकी मुलाकात के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। ऐसा ही एक वीडियो फिर से सामने आया है।

असम सीएम हिमंता सरमा ने यह वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया है, जो अब खूब वायरल हो रहा है। इसमें एक बुजुर्ग महिला असम सीएम को एक बच्चे की तरह दुलार रही है। सीएम भी उनसे अपनी मां की तरह मुलाकात कर रहे हैं। हिमंता सरमा ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा है- जनता का आशीर्वाद।

पहले पप्पी फिर जादू की झप्पी

इस वीडियो में महिला दुलार में यह भूल जाती है कि वह असम के मुख्यमंत्री के सामने है। हालांकि, सीएम सरमा बुजुर्ग महिला के साथ बिल्कुल सहज रहते हैं। महिला पहले प्यार से उन्हें गले लगा देती है और एक मां की तरह अपने रुमाल से कुछ निकालकर उन्हें देती है।

पहले भी सामने आए हैं ऐसे वीडियो

असम के मुख्यमंत्री का इस तरह का यह कोई पहला वीडियो नहीं है। ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं, जिसमें जनता का उनके लिए प्यार दिखता है। इससे पहले एक वीडियो में एक महिला की शिकायत सुनने के लिए असम के सीएम सरमा घुटनों पर ही बैठ गए थे। बता दें, उनकी इस तरह की तस्वीरों और वीडियो की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा होती है। जनता का भी उन्हें खूब प्यार मिलता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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