देश भर की निचली अदालतों ने 2022 में 165 दोषियों को मौत की सजा सुनाई, जो वर्ष 2000 के बाद से सर्वाधिक है। यह खुलासा एक रिपोर्ट में किया गया है।राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की प्रोजेक्ट 39ए के तहत यहां जारी वार्षिक सांख्यिकी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2015 के बाद जिन दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई, उन कैदियों की संख्या में 40 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इस तरह की 50 प्रतिशत (51.28 प्रतिशत) सजा यौन अपराधों के मामलों में दोषियों को सुनाई गई है।वर्ष 2022 में मृत्युदंड की सजा की संख्या को अहमदाबाद बम धमाके के मामले में 38 लोगों को सुनाई गई इस तरह की सजा ने प्रभावित किया है। वर्ष 2016 के बाद यह पहली बार हुआ है जब एक ही मामले में इतने लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय ने मौत की सजा के क्रमश: 11 और 68 मामलों का निस्तारण किया है।
सबसे अधिक मौत की सजा उत्तर प्रदेश में (100 दोषियों को) सुनाई गई। वहीं, गुजरात में 61, झारखंड में 46, महाराष्ट्र में 39 और मध्य प्रदेश में 31 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई।
