Jharkhand Students Protest: झारखंड विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में चल रहे छात्रों के आंदोलन पर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों की समस्याओं को गहराई से समझने और उनके समाधान के लिए बातचीत करने को पूरी तरह तैयार है।
मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, "जो माध्यम हमने बना रखा है, सरकार उसके जरिए छात्रों से बातचीत करने को तैयार है। सरकार यह जानने की इच्छा रखती है कि छात्रों की असल समस्या क्या है।" उन्होंने आगे कहा कि छात्रों की जो मांगें और इच्छाएं हैं, उन्हें सरकार जयपाल सिंह स्टेडियम के बाहर तक ले जाएगी और व्यापक स्तर पर उस पर विचार करेगी।
पूरे राज्य के युवाओं से मांगी राय
राज्यभर के युवाओं को जोड़ने की बात कहते हुए सीएम ने कहा, "पूरे राज्य में जो भी छात्र-छात्राएं इस संबंध में अपने विचार रखते हैं, वे अपनी राय निसंकोच दे सकते हैं।" मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि छात्रों से मिलने वाले सुझावों और उनकी जिज्ञासाओं के आधार पर सरकार एक मजबूत और बड़ा रिफॉर्म (सुधार) लागू करेगी, ताकि युवाओं के भविष्य और आकांक्षाओं के अनुरूप नीतियां बनाई जा सकें।
क्या है आंदोलनाकरियों की मांग?
बता दें कि आंदोलन 14वें दिन प्रवेश कर चुका है। देर रात करीब 10:45 बजे प्रशासन की ओर से एसडीओ और एसडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की कोशिश की। प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि राज्य सरकार केवल छात्र प्रतिनिधियों से ही बातचीत करने के लिए तैयार है।
हालांकि, आंदोलनकारी छात्र अपने पहले से घोषित 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पर अड़े रहे। छात्रों की मांग है कि इस प्रतिनिधिमंडल में छात्र नेताओं के अलावा एक पत्रकार और एक अधिवक्ता को भी शामिल किया जाए, ताकि वार्ता पूरी तरह पारदर्शी रहे।देर रात तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत का दौर चलता रहा, लेकिन प्रतिनिधिमंडल की संरचना को लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसी वजह से वार्ता किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग है कि कथित अनियमितताओं के कारण 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक (PT) परीक्षा को रद्द किया जाए। उनका कहना है कि यदि परीक्षा निष्पक्ष नहीं हुई है तो इसे दोबारा कराया जाना चाहिए। राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंपी है, लेकिन छात्र इस पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि भविष्य की सभी भर्ती परीक्षाओं में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे पेपर लीक, कथित धांधली और चयन प्रक्रिया पर सवाल न उठें। उनका कहना है कि पूरी भर्ती प्रणाली में सुधार जरूरी है। छात्रों की मांग है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि केवल जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
