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Heatwave in India: गर्मी निगल चुकी है भारत के 167 अरब घंटे, GDP को हुआ 5.4% का नुकसान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 22, 2023, 09:44 PM IST

Heatwave in India: मेडिकल जर्नल लैसेंट की बीते साल प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में गर्मी के कारण मौतों में 55 प्रतिशत इजाफा दर्ज किया गया है। वहीं, 2021 में 167.2 अरब घंटों का नुकसान भी हुआ था।

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देश के कई राज्य भयानक लू की चपेट में

Photo : BCCL

Heatwave in India: देश में कई राज्यों में तापमान में लगातार वृद्धि होती जा रही है। पारा सामान्य से ऊपर निकलकर 45 डिग्री तक जा पहुंचा है। आलम यह है कि कई राज्य भयानक हीटवेव की चपेट में आ चुके हैं। खतरा इतना ज्यादा बढ़ गया है कि कई राज्यों में स्कूलों में छुट्टियां तक कर दी गई हैं, तो कई राज्यों में सरकार की ओर से अलग से एडवाइजरी भी जारी की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल सामान्य से अधिक तापमान रहने की चेतावनी जारी की है। यानी पारा 40 डिग्री के ऊपर रहेगा। हालांकि, सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि हीटवेव ने इस बार समय से पहले ही देश के कई राज्योंं को अपनी चपेट में ले लिया है। अब देश में बढ़ते तापमान को लेकर एक स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कहा गया है कि बढ़ते तापमान के कारण मृत्युदर बढ़ रही है और इससे काम के घंटे भी प्रभावित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर जीडीपी पर पड़ रहा है।

साल दर साल बढ़ रहीं गर्मी से होने वाली मौतें

इसी महीने महाराष्ट्र के नवी मुंबई में प्रचंड गर्मी के कारण 12 लोगों की जान चली गई। यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी साल-दर-साल अत्यधिक गर्मी के कारण मृत्युदर में इजाफा हुआ है। मेडिकल जर्नल लैसेंट की एक रिपोर्ट में मुताबिक, भारत में 2000 से 2004 और 2017 से 2021 के बीच गर्मी के कारण होने वाली मौतों में 55 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। नेशलन डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार 2000 से 2021 तक भारत में हीटवेव के कारण 17,767 लोगों की मौत हुई है। सबसे ज्यादा मौतें 2015 में दर्ज की गई थीं, जब 2040 लोगों की मौत हुई थी। जबकि, एनसीआरबी के आंकड़े इससे अलग हैं।

भारत में घट रहे काम के घंटे

लैंसेट की स्टडी के मुताबिक, भारत में अत्यधिक गर्मी काम असर काम के घंटों पर भी पड़ रहा है। 2021 में भारत में 167.2 अरब घंटों के काम का नुकसान हुआ, इसकी वजह से देश की जीडीपी को 5.4 फीसदी का नुकसान झेलना पड़ा। इससे पहले 2019 में भारत ने प्रति व्यक्ति 118.3 अरब घंटे का नुकसान हुआ था। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनिया में बढ़ती गर्मी का सीधा असर काम करने वाले मजदूरों पर पड़ेगा। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में बढ़ती गर्मी के कारण 2030 तक तीन करोड़ से ज्यादा नौकरियां खत्म हो सकती हैं। कहा गया था कि मजदूर बढ़ते तापमान के कारण दिन के घंटों में काम नहीं कर पाएंगे, जिससे नौकरियां खत्म होंगी।

औसत तापमान में हुई 0.7% की वृद्धि

एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारत के औसत तापमान में 0.7% की वृद्धि हुई है। 2050 तक इसमें दो से चार गुना बढ़ोत्तरी की और संभावना जताई गई है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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