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केरल की रैली में ऑनलाइन जुड़ा हमास का नेता खालिद, हिंदुत्व और यहूदियों के खिलाफ लगे नारे! चढ़ा सियासी पारा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 28, 2023, 11:39 AM IST

Hamas Leader Khaled Mashal: केरल के मल्लपुर में फिलिस्तीन के समर्थन में एक रैली का आयोजन किया गया। कथित तौर पर इस रैली में हमास नेता खालित मशेल का वर्जुअल संबोधन हुआ, जिसने सियासी हंगामे को जम्न दे दिया है। रैली में बुलडोजर हिंदुत्व और रंगभेदी यहूदीवाद को उखाड़ फेंको का नारा दिया गया है।

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हमास का नेता खालिद मशेल

Photo : Twitter

Hamas Leader Khaled Mashal: गाजा में इजराइल और हमास के बीच जारी जंग के बाद दुनिया दो धड़ों में बंट गई है। एक तरफ फिलिस्तीन के समर्थन करने वाले लोग हैं तो गाजा में इजराइली कार्रवाई को भी लोग वाजिब ठहरा रहे हैं। इस बीच कई देशों में फिलिस्तीन और इजराइल के समर्थन में प्रदर्शन और रैलियां शुरू हो गई हैं। भारत भी ऐसे ही देशों में से एक है। हालांकि, केरल में फिलिस्तीन के समर्थन में हुई रैली के बाद बवाल मचा हुआ है।

दरअसल, केरल के मल्लपुर में फिलिस्तीन के समर्थन में एक रैली का आयोजन किया गया। कथित तौर पर इस रैली में हमास नेता खालिद मशेल का वर्जुअल संबोधन हुआ, जिसने सियासी हंगामे को जम्न दे दिया है। भाजपा ने इसको लेकर कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रैली में बुलडोजर हिंदुत्व और रंगभेदी यहूदीवाद को उखाड़ फेंको का नारा दिया गया है।

जमात-ए-इस्लामी की यूथ विंग ने आयोजित की थी रैली

बताया जा रहा है कि केरल के मल्लपुरम में शुक्रवार को एकजुटता युवा आंदोलन जमात-ए-इस्लामी की यूथ विंद की ओर से रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली को हमास नेता खालिद ने वर्चुअली संबोधित किया था। उसके पोस्टर भी सामने आए हैं। भाजपा ने के सुरेंद्रन ने रैली में हमास नेता की उपस्थिति पर आपत्ति जताई है और कार्रवाई की मांग की है।

विजयन सरकार पर साधा निशाना

केरल भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने इसको लेकर केलर की पिनराई विजयन सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा, केरल के मल्लपुरम में सॉलिडेरिटी कार्यक्रम में हमास नेता खालिद मशेल का वर्जुअल संबोधन चिंताजनक है। पिनराई विजयन की केरल पुलिस कहां हैं? उन्होंने आगे कहा, फिलिस्तीन बचाओ की आड़ में वे एक आतंकी संगठन हमास और उसके नेताओं को योद्धा के रूप में महिमामंडित कर रहे हैं। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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