गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों को लेकर राज्य सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में वायरस की मौजूदा स्थिति, संक्रमित जिलों, जांच प्रक्रिया और रोकथाम के उपायों की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को संक्रमण के स्रोत का पता लगाने के लिए प्रत्येक मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री और केस हिस्ट्री का गहन विश्लेषण करने के निर्देश दिए।
गुजरात में 63 संदिग्ध, 12 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में अब तक चांदीपुरा वायरस के कुल 63 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 12 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। पॉजिटिव मामलों में 9 मरीज गुजरात के जबकि 3 मरीज राजस्थान के निवासी हैं। अब तक 63 में से 55 नमूनों की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 8 नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है।
किन जिलों में मिले संक्रमित मरीज?
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गुजरात के पॉजिटिव मामलों में पंचमहल और खेड़ा जिले से दो-दो मामले सामने आए हैं। इसके अलावा साबरकांठा, महेसाणा, भरूच, भावनगर और अहमदाबाद नगर क्षेत्र से एक-एक मरीज की पुष्टि हुई है।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिए कि जहां भी संक्रमण का मामला सामने आए, वहां विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वायरस के प्रसार के कारणों को समझने के लिए मरीजों की यात्रा और संपर्क संबंधी जानकारी का विस्तृत अध्ययन किया जाए।
अस्पतालों को किया गया अलर्ट
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में कच्चे और पक्के मकानों सहित हजारों घरों में व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया है। वायरस के वाहक माने जाने वाले सैंडफ्लाई और अन्य कीटों पर नियंत्रण के लिए कच्चे मकानों तथा पशुओं के बाड़ों के आसपास युद्धस्तर पर डस्टिंग अभियान चलाया जा रहा है।
राज्य सरकार ने सभी जिला मुख्यालयों की सिविल अस्पतालों और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में बच्चों के लिए आईसीयू बेड, आवश्यक दवाओं और वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
चांदीपुरा वायरस के लक्षण
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सामान्यतः मानसून और सितंबर तक चांदीपुरा वायरस की सक्रियता अधिक रहती है। चूंकि यह वायरस मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करता है, इसलिए यदि किसी बच्चे में अचानक तेज बुखार, दौरे पड़ना, उल्टी, दस्त या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना चाहिए।
लोगों से अपील
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हैं तथा लोगों से अपील की कि वे घबराएं नहीं, बल्कि आवश्यक सावधानियां बरतें और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
