सांकेतिक फोटो (istock)
Ahmedabad News: अहमदाबाद से गिरफ्तार किए गए ISIS के आतंकियों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। इन आतंकियों ने लखनऊ, दिल्ली और अहमदाबाद में कई संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी। आतंकियों ने लखनऊ के आरएसएस कार्यालय, दिल्ली की आजाद मंडी और अहमदाबाद के नरोड़ा फ्रूट मार्केट की रेकी की थी। जिसके वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को भेजे थे। वीडियो में उन्होंने बताया कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में कैसे हमला किया जा सकता है। एटीएस की त्वरित कार्रवाई से बड़ी आतंकी साजिश नाकाम किया गया।
गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने एक डॉक्टर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर हथियारों और रसायनों के साथ एक बड़ा आतंकवादी हमले करने की साजिश रचने रहे थे। गुजरात एटीएस के उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) सुनील जोशी ने बताया कि आरोपियों में तेलंगाना के एक और उत्तर प्रदेश के दो नागरिक हैं और वे हथियारों का आदान-प्रदान करने के लिए गुजरात में थे और उन्होंने एक शक्तिशाली जहर 'रिसिन' से आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रची थी। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने यह भी खुलासा किया है कि उनका आका ड्रोन के जरिये हथियारों की खेप पाकिस्तान से भेजता है।
जोशी ने संवाददाताओं को बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर एटीएस की एक टीम ने सात नवंबर को गांधीनगर के अडालज के निकट तेलंगाना के हैदराबाद निवासी डॉ. अहमद मोहिउद्दीन सैयद को गिरफ्तार किया, जिसके पास दो ग्लॉक पिस्तौल, एक बेरेटा पिस्तौल, 30 कारतूस और अरंडी का चार लीटर तेल बरमाद किया गया। पूछताछ में सैयद ने बताया कि वह आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहा था और उसने गांधीनगर जिले के कलोल में एक सुनसान जगह से हथियार एकत्र किए थे।
डीआईजी ने बताया कि एटीएस टीम ने सैयद के मोबाइल फोन से मिली जानकारी के आधार पर उसे हथियार आपूर्ति करने वाले लोगों को भी गिरफ्तार किया है। अधिकारी ने बताया कि अन्य आरोपी आजाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल मोहम्मद सलीम, दोनों उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जिन्हें बनासकांठा जिले से गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि आतंकी आजाद शेख और मोहम्मद सुहैल ने राजस्थान के हनुमानगढ़ से हथियारों को गुजरात के कलोल के एक सुनसान इलाके में छिपाया था। हथियार छुपाने के फोटो और वीडियो पाकिस्तान में बैठे अपने आका को भेजे गए थे। दोनों आतंकी राजस्थान से अहमदाबाद ट्रेन के जरिए हथियार लेकर आए थे और फिर कलोल पहुंचकर उन्हें छिपाया। बाद में डॉ. अहमद सैयद भी गुजरात पहुंचे और जब अंधेरे के चलते हथियार नहीं मिले तो उन्होंने Telegram ऐप के जरिए पाकिस्तान में बैठे अपने आका और बाकी आतंकियों से संपर्क कर हथियार हासिल किए। लौटते समय अडालज टोल प्लाजा के पास एटीएस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सैयद की गिरफ्तारी और मोबाइल की जांच के बाद आजाद शेख और मोहम्मद सुहेल के नाम सामने आए, जिन्हें बाद में बनासकांठा से पकड़ा गया।
अधिकारी ने बताया कि सैयद का आका अबू खदीजा अफगानिस्तान का निवासी है और आईएसकेपी (इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत) से जुड़ा है तथा वह पाकिस्तान के कई लोगों के संपर्क में भी रहा है। जोशी ने बताया, "चीन से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने वाला सैयद एक बड़े आतंकवादी हमले को अंजाम देने के लिए 'रिसिन' नाम का एक बेहद घातक जहर तैयार कर रहा था। उसने जरूरी शोध शुरू कर दिया था, उपकरण और कच्चा माल जुटा लिया था और शुरुआती रासायनिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।" उन्होंने कहा कि सैयद उच्च शिक्षित और कट्टरपंथी है, तथा उसने बड़ी आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश के तहत धन इकट्ठा करने और लोगों की भर्ती करने की योजना बनाई थी।
उन्होंने बताया कि तीनों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय न्याय संहिता और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। एक अदालत ने सैयद को 17 नवंबर तक एटीएस की हिरासत में भेजा है, जबकि दो अन्य को रविवार को अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे आईएसकेपी से जुड़े हैं या नहीं, यह जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि गुजरात एटीएस भी विभिन्न राज्यों में मामले की जांच कर रही है।
(इनपुट - भाषा)
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