ब्रिक्स 2026 में बैठक के पहले ही दिन संयुक्त प्रस्ताव पर सभी 11 देशों में साझा सहमति बनवाकर भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी कूटनीति का लोहा मनवा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, संयुक्त प्रस्ताव में कई संवेदनशील मुद्दों को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद था, बावजूद इसके शुक्रवार देर रात से जारी बातचीत में आखिरकार शनिवार सुबह चार बजते-बजते सभी सदस्य संयुक्त बयान जारी करने पर सहमत हो गए। जिसके बाद आज पीएम मोदी ने ब्रिक्स 2026 के साझा घोषणापत्र को जारी करने का एलान भी कर दिया। आज हम विस्तार से और आसान शब्दों में समझेंगे कि ब्रिक्स 2026 के नई दिल्ली घोषणापत्र में क्या क्या है...
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
BRICS नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग दोहराई। नई दिल्ली घोषणा में कहा गया कि मौजूदा वैश्विक संस्थागत ढांचा आज की आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता इसलिए वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण, प्रतिनिधित्वपूर्ण, लोकतांत्रिक और जवाबदेह बनाने की जरूरत है।BRICS ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का भी समर्थन किया। घोषणा में विकासशील देशों, विशेषकर अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों की भूमिका बढ़ाने की बात कही गई। चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षा के प्रति समर्थन भी दोहराया।
नेताओं ने IMF और विश्व बैंक जैसे संस्थानों में भी विकासशील देशों की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की। BRICS ने IMF कोटे और मतदान अधिकारों में बदलाव तथा विश्व बैंक की हिस्सेदारी व्यवस्था में सुधार का समर्थन किया, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकासशील देशों की बढ़ती भूमिका अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में भी दिखाई दे।
ब्रिक्स 2026
आतंकवाद पर कड़ा रुख,पहलगाम हमले की निंदा
BRICS देशों ने आतंकवाद को उसके सभी रूपों में अपराध और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। इस दौरान सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर देते हुए आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने की जरूरत बताई। साथ ही इसमें व्यापक आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने और संयुक्त राष्ट्र के तहत Comprehensive Convention on International Terrorism को जल्द अंतिम रूप देने की भी मांग की।
गाजा में युद्धविराम और फिलिस्तीन के अधिकारों का समर्थन
मध्य पूर्व की स्थिति पर BRICS ने गहरी चिंता जताई। घोषणापत्र में गाजा में युद्धविराम बनाए रखने और वहां मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की गई है। साथ ही ब्रिक्स देशों ने गाजा से फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन की किसी भी नीति का विरोध किया। घोषणा में कहा गया कि फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए और स्थायी समाधान के लिए दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है।घोषणापत्र में सदस्य देशों ने 1967 की सीमाओं के आधार पर एक संप्रभु और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन का समर्थन किया साथ ही कहा कि इसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो। साथ ही संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन की पूर्ण सदस्यता के समर्थन को दोहराया गया। साथ ही लेबनान में युद्धविराम का स्वागत करते हुए UNSC Resolution 1701 को पूरी तरह लागू करने और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की अपील भी की गई।
ब्रिक्स के सदस्य देशों ने लगाया पौधा।
व्यापार में स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा
आर्थिक मोर्चे पर BRICS देशों ने सीमा पार भुगतान व्यवस्था को आसान और सस्ता बनाने की दिशा में काम जारी रखने का फैसला किया। घोषणा में कहा गया कि सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश के निपटान की संभावनाओं पर काम हो रहा है। इसमें BRICS Payment Task Force को ऐसे भुगतान समाधान विकसित करने के लिए आगे काम करने को कहा गया जो तेज, कम लागत वाले, सुरक्षित, पारदर्शी और अधिक सुलभ हों। हालांकि घोषणा में यह भी स्पष्ट किया गया कि स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को लेकर सभी देशों के लिए एक जैसी व्यवस्था जरूरी नहीं है और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाएगा।
BRICS ने आर्थिक साझेदारी की रणनीति 2030 को आगे बढ़ाने में भारत की अध्यक्षता के दौरान हुई प्रगति का भी स्वागत किया। साथ ही सदस्य देशों के बीच अधिक मजबूत और टिकाऊ सप्लाई चेन विकसित करने तथा व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
WTO सुधार और एकतरफा टैरिफ पर चिंता
इस साझा घोषणापत्र में BRICS देशों ने विश्व व्यापार संगठन यानी WTO में सुधार की मांग भी दोहराई। साथ ही संगठन ने एक खुले, पारदर्शी, निष्पक्ष और नियम आधारित बहुपक्षीय व्यापार तंत्र को मजबूत करने की बात कही। इतना ही नहीं, घोषणा में एकतरफा बढ़ाए जा रहे टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। संगठन ने WTO की दो-स्तरीय बाध्यकारी विवाद निपटान व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने और अपीलीय निकाय में नए सदस्यों की नियुक्ति की मांग की।AI और डिजिटल तकनीक पर बड़ा फोकस
ब्रिक्स की नई दिल्ली घोषणा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आर्थिक विकास और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर करार दिया गया है। इसमें सदस्य देशों ने भरोसेमंद AI तकनीक विकसित करने, AI का इस्तेमाल आर्थिक विकास और सामाजिक हित के लिए करने तथा इसके संभावित जोखिमों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। भारत में फरवरी 2026 में आयोजित AI Impact Summit का भी घोषणा में उल्लेख किया गया।
ब्रिक्स से आई बेहद मजबूत तस्वीर।
स्वास्थ्य में टीबी और महामारी से मुकाबले पर सहयोग
इसके साथ ही नई दिल्ली घोषणापत्र में स्वास्थ्य क्षेत्र में BRICS ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को मजबूत करने और सदस्य देशों के बीच अनुभव तथा तकनीक साझा करने पर जोर दिया। टीबी को गंभीर वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताते हुए शोध, तकनीक और सहयोग के जरिए इसे खत्म करने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई गई। साथ ही BRICS Integrated Early Warning System के लिए एक विशेष उप-कार्य समूह के गठन का भी स्वागत किया गया। साथ ही इसमें मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रशिक्षण और शोध के लिए BRICS Training Hub Network और Centres of Excellence नेटवर्क विकसित करने की बात कही गई, जिसमें NIMHANS को समन्वयकारी केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया।
खाद्य सुरक्षा पर पहल
BRICS देशों ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। घोषणा में अनाज, उर्वरक और अन्य कृषि उत्पादों की आपूर्ति में आने वाले संकटों से निपटने की जरूरत बताई गई। सदस्य देशों ने BRICS Grain Exchange स्थापित करने की पहल पर आगे चर्चा का स्वागत किया। इसे आगे चलकर अन्य कृषि उत्पादों और वस्तुओं तक विस्तारित करने की संभावना भी जताई गई।
ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज
BRICS ने ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बताया। घोषणा में कहा गया कि ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति, विविध स्रोतों और मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत है। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोजन, जलविद्युत, ऊर्जा भंडारण और कम-कार्बन तकनीकों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देने की बात कही गई। वहीं, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और विविध सप्लाई चेन विकसित करने पर भी जोर दिया गया। BRICS ने कहा कि ये खनिज कम-उत्सर्जन वाली ऊर्जा तकनीकों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम हैं।
जलवायु परिवर्तन पर साझा रुख
ब्रिक्स देशों ने इस दौरान जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पेरिस समझौते और UNFCCC के तहत प्रतिबद्धताओं को लागू करने की जरूरत दोहराई। विकासशील देशों को जलवायु वित्त उपलब्ध कराने और अनुकूलन, नुकसान एवं क्षति से जुड़े प्रयासों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस घोषणापत्र में कहा गया कि कई विकासशील देशों पर भारी कर्ज का बोझ जलवायु और विकास से जुड़े निवेश को प्रभावित कर रहा है। ऐसे देशों के लिए कर्ज स्थिरता और जलवायु वित्त बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की जरूरत है।BRICS ने एकतरफा और भेदभावपूर्ण कार्बन सीमा उपायों का भी विरोध किया, जिनका विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका बढ़ाने पर जोर
घोषणा में न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी NDB को ग्लोबल साउथ के विकास और बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा करने वाली महत्वपूर्ण संस्था बताया गया। बैंक की स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण क्षमता बढ़ाने, संसाधन जुटाने, वित्त के स्रोतों में विविधता लाने और टिकाऊ विकास परियोजनाओं को समर्थन देने पर जोर दिया गया। साथ ही भारत की अध्यक्षता में BRICS-NDB Knowledge Portal शुरू किए जाने का भी स्वागत किया गया। इसमें सदस्य देशों और NDB द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं के अनुभव, नीतिगत नवाचार और बेहतरीन तौर-तरीकों को साझा करने की व्यवस्था होगी।
भारत के लिए अहम पहल
भारत की अध्यक्षता में BRICS ने कई नई पहलों को आगे बढ़ाया। इनमें स्थानीय मुद्राओं में सीमा पार भुगतान पर काम, AI और डिजिटल सहयोग, MSME सहयोग, स्वास्थ्य, कृषि, आपदा प्रबंधन, शहरी विकास और NDB से जुड़ी पहल शामिल हैं। साथ ही इस घोषणापत्र में भारत द्वारा आगरा में आयोजित पहले BRICS SME Forum की भी सराहना की गई। साथ ही भारत में BRICS Industrial Competencies Centre की स्थापना और विभिन्न औद्योगिक तथा तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग का स्वागत किया गया।भारत की अध्यक्षता के दौरान GIFT City में BRICS Risk Lab की मेजबानी के प्रस्ताव पर भी सदस्य देशों ने रुचि दिखाई। इसका उद्देश्य बीमा और पुनर्बीमा क्षमता, जोखिम मॉडल तथा विशेषज्ञता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है।
महिला उद्यमिता और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर
विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के साथ पीएम मोदी की गर्मजोशी।
महिला उद्यमिता और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। BRICS Women's Business Alliance के माध्यम से महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबारों के लिए वित्त, बाजार, तकनीक और कौशल तक पहुंच बेहतर करने की सिफारिशों का स्वागत किया गया।
चीन को 2027 की अध्यक्षता
नई दिल्ली घोषणा के अंत में BRICS देशों ने भारत की 2026 की अध्यक्षता की सराहना की और नई दिल्ली में 18वें शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत सरकार और जनता का आभार जताया। साथ ही 2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन को सौंपने और अगले यानी 19वें BRICS शिखर सम्मेलन के चीन में आयोजित होने का समर्थन किया गया।
