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कहां से आए 5 ओरंगुटान? BJD ने मांगी CBI-NIA-IB जांच; तस्करी से लेकर बॉर्डर सिक्योरिटी पर उठे सवाल

ओडिशा के बालासोर में पांच शिशु ओरंगुटान मिलने के मामले में BJD ने CBI, NIA और IB की बहु-एजेंसी जांच की मांग की है। पार्टी ने वन्यजीव तस्करी के साथ गंभीर सुरक्षा चूक की आशंका जताते हुए जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की।

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ओडिशा में पांच ऑरंगुटान मिलने पर BJD ने मांगी CBI-NIA-IB जांच

भुवनेश्वर : बालासोर जिले के भोगराई के जंगल से पांच शिशु ओरंगुटान मिलने के मामले ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) ने इस मामले की जांच को केवल वन्यजीव तस्करी तक सीमित रखने के बजाय सीबीआई, एनआईए और आईबी जैसी केंद्रीय एजेंसियों को शामिल करते हुए बहु-एजेंसी जांच की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह मामला देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर गंभीर सुरक्षा चूक की ओर इशारा करता है।

पांचों ओंरंगुटान को 8 सितंबर को बालासोर जिले के भोगराई के एक जंगल से बरामद किया गया था। BJD के भोगराई विधायक गौतम बुद्ध दास ने कहा कि ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) को वन्यजीव तस्करी के एंगल से जांच जारी रखनी चाहिए, लेकिन मामले की जांच को केवल वन्यजीव अपराध तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

दास ने कहा कि जिंदा ओरंगुटान कई राज्यों से होते हुए भोगराई तक कैसे पहुंच गए, यह गंभीर सवाल है। उन्होंने दावा किया कि यदि अवैध सामान की आवाजाही पर सुरक्षा एजेंसियों की प्रभावी निगरानी होती तो इतने बड़े वन्यजीवों को कई राज्यों से आसानी से ले जाना संभव नहीं होना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि यदि जिंदा ओरंगुटान इतनी आसानी से बालासोर तक पहुंच सकते हैं तो आतंकवादी, हथियार, नकली नोट, ड्रग्स और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी यहां पहुंच सकती है। उन्होंने बालासोर में मौजूद संवेदनशील रक्षा प्रतिष्ठानों का हवाला देते हुए मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा।

समुद्री रास्ते से भारत लाए गए ओरंगुटान

BJD विधायक ने दावा किया कि घटना सामने आने के पांच दिन बाद भी जांच एजेंसियां किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं ले सकी हैं और न ही कथित तौर पर ओरंगुटान को ले जाने वाले वाहनों का पता लगाया जा सका है। उन्होंने आशंका जताई कि ओरंगुटान को समुद्री रास्ते से भारत लाया गया हो सकता है और पूर्वी तट पर मरीन पुलिस थानों को मजबूत करने की मांग की।

दास के मुताबिक, अधिकारियों ने भी यह संभावना जताई है कि ओरंगुटान मिजोरम की अंतरराष्ट्रीय सीमा से पश्चिम बंगाल होते हुए ओडिशा के भोगराई तक लाए गए होंगे। उन्होंने कहा कि दीघा-उदयपुर-चंदनेश्वर और भोगराई के रास्ते पर ऐसी सुरक्षा जांच की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और तस्करों ने ग्रामीण सड़कों का इस्तेमाल किया हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति में देश विरोधी तत्व बालासोर और भद्रक तट के साथ-साथ चांदीपुर या एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक भी पहुंच सकते हैं।

हालांकि, सत्तारूढ़ बीजेपी ने BJD की बहु-एजेंसी जांच की मांग को खारिज कर दिया। बीजेपी विधायक इरासिश आचार्य ने कहा कि STF और WCCB पेशेवर एजेंसियां हैं और मामले की जांच कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त जांच से दोषियों को पकड़ने में मदद मिलेगी, लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

जयराम रमेश ने वन्यजीव तस्करी के लगाए आरोप

पूर्व केंद्रीय वन मंत्री जयराम रमेश ने भी मामले में अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि ओडिशा के जंगलों में ऑरंगुटान मिलने की खबर से वह हैरान हैं और ऐसा लगता है कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर का तस्करी नेटवर्क हो सकता है।

ओंरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं - कांग्रेस

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी कहा कि ओरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तस्करों ने पकड़े जाने के डर से उन्हें बालासोर के जंगल में छोड़ दिया होगा। उन्होंने वन विभाग से मामले की जांच करने और ऑरंगुटान के उचित पुनर्वास की मांग की।

फिलहाल पांचों ऑरंगुटान को भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में रखा गया है। उन्हें तापमान नियंत्रित क्वारंटीन सुविधा में रखा गया है। ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (OUAT) के पशु चिकित्सा विभाग के प्रमुख आदित्य आचार्य ने बताया कि सभी ऑरंगुटान निगरानी में हैं।

उन्होंने कहा कि शिशु ओरंगुटान फिलहाल स्वस्थ और सक्रिय नजर आ रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी मां की कमी महसूस हो रही है। आमतौर पर ऑरंगुटान के बच्चे जन्म के बाद तीन से चार साल तक अपनी मां के बेहद करीब रहते हैं और इसके बाद ही स्वतंत्र रूप से रहना शुरू करते हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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