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कैश फॉर जॉब स्कैम में नया खुलासा! पूर्व विधायक के बड़े दावे के बाद उठने लगे सवाल; जानें क्या है माजरा

Cash for Job Scam: गोवा की सियासत में इन दिनों घोटाले के मुद्दे ने जोर पकड़ रखा है। विरोधी दलों के नेता लगातार सूबे की प्रमोद सावंत सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच कैश फॉर जॉब स्कैम से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार पूर्व विधायक ने सनसनीखेज दावा किया है।

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पूर्व विधायक फारेल फुर्ताडो ने किया बड़ा दावा।

Goa Politics: आखिर गोवा के कैश फॉर जॉब घोटाले का सच क्या है? विपक्षी दलों के नेता लगातार सरकार पर सवाल खड़ा कर रहे हैं, एक के बाद एक नए दावे सामने आ रहे हैं। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और गोवा की स्थानीय पार्टी के नेता लगातार सीएम सावंत पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच गोवा की एक पूर्व विधायक ने एक सनसनीखेज दावा किया, जिसके बाद सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल इस स्कैम की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हाथों में है। आपको बताते हैं कि आखिर 25 लाख रुपये के भुगतान वाला नया मामला क्या है।

जब पूर्व विधायक ने पुलिस भर्ती में 'रिश्वतकांड' का किया दावा

हाल ही में सीएम प्रमोद सावंत ने एक कार्यक्रम 'Goa Legislator Day' में शिरकत किया था। जहां गोवा की पूर्व विधायक फारेल फुर्ताडो ने ऐसा दावा किया, जिससे हर कोई सन्न रह गया। पूर्व विधायक ने गोवा विधानसभा के विधायकों के दिवस कार्यक्रम में भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानताओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अपनी बात में एक चौंकाने वाले खुलासे का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें यह सुनकर झटका लगा कि उनके छात्रों ने उन्हें बताया कि पुलिस में भर्ती होने के लिए उन्होंने 25 लाख रुपये तक का भुगतान किया। उन्होंने सवाल किया, "क्या वाकई ‘कैश फॉर जॉब’ आज की हकीकत बन गया है?"

पूर्व विधायक के इस दावे का क्या जांच पर पड़ेगा असर?

क्या सचमुच पुलिस भर्ती के लिए 25 लाख रुपये तक की रिश्वत दी गई? इस सवाल का जवाब तो जांच के बाद ही मिल पाएगा। पूर्व विधायक के इस दावे के बाद क्या जांच एजेंसी इस नए एंगल से भी मामले को खंगालने की कोशिश करती है? ये देखना वाकई दिलचस्प होगा। कैश फॉर जॉब स्कैम ने इन दिनों सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रखा है। आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह के खिलाफ तो खुद सीएम सावंत की पत्नी ने मानहानि का मुकदमा कर रखा है। दरअसल, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की पत्नी सुलक्षणा सावंत ने कैश-फॉर-जॉब घोटाले पर संजय सिंह के आरोपों को लेकर 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया था। एक दिन पहले ही इस मामले की सुनवाई के दौरान संजय सिंह ने गोवा की एक अदालत में कहा कि वे मानहानि केस की अगली सुनवाई तक गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की पत्नी सुलक्षणा सावंत के खिलाफ कोई बयान नहीं देंगे।

वहीं अब इस मामले में भारतीय जनता पार्टी भी हमलावर होती नजर आ रही है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने संजय सिंह पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस मामले में संजय सिंह फंस गए हैं। खुद प्रमोद सावंत ने ये बात कही थी कि इस मामले का कोई राजनीतिक कनेक्शन नहीं है। फिलहाल पूर्व विधायक फुर्ताडो ने अपने इस दावे से गोवा का सियासी पारा और बढ़ा दिया है। देखना होगा कि उनके इस दावे के बाद क्या विरोधी दलों के नेता भी सवाल उठाते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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