जर्मनी ने भारतीय यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा (Airport Transit Visa) की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। अब भारतीय नागरिकों को किसी तीसरे देश की यात्रा के दौरान जर्मनी के हवाई अड्डों पर ट्रांजिट के लिए अलग से वीजा लेने की जरूरत नहीं होगी।
जर्मनी ने इस बाबत संघीय विधि राजपत्र (Bundesgesetzblatt) एक आदेश जारी किया है। इसमें बताया गया है कि यह नियम कल यानी तीन जून से प्रभावी होगा। नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास के अनुसार, इस बारे में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की इसी साल जनवरी में हुई भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी से वार्ता हुई थी। साथ ही इसे लेकर कुछ समझौते भी हुए थे, अब आया फैसला उसी का परिणाम है। दूतावास ने कहा कि यह कदम भारत-जर्मनी संबंधों को और मजबूत करने, लोगों की आवाजाही को आसान बनाने तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की जर्मन सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
ट्रांजिट वीजा क्या है?
ट्रांजिट वीजा एक अल्पकालिक परमिट है जो यात्रियों को किसी देश से होकर गुजरने की अनुमति देता है, ताकि वे अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने के लिए कुछ समय के लिए वहां रुक सकें। इस वीजा के लिए आगे की यात्रा का प्रमाण आवश्यक है और आपके दस्तावेजों से यह स्पष्ट होना चाहिए कि आप उस देश में लंबे समय तक रुकने का इरादा नहीं रखते हैं।
वीजा-मुक्त ट्रांजिट का भारतीयों के लिए क्या अर्थ है?
जर्मनी के इस नए कदम के साथ, बर्लिन और अन्य जर्मन हवाई अड्डों पर रुकने वाले भारतीयों को अब ट्रांजिट वीजा के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले भारतीय नागरिकों को फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख या बर्लिन जैसे अंतरराष्ट्रीय पारगमन क्षेत्रों में ठहरने पर भी शेंगेन ट्रांजिट वीजा के लिए आवेदन करना पड़ता था। और यह वीजा तब भी आवश्यक था जब यात्री जर्मनी या व्यापक शेंगेन क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर रहे थे। हालांकि, इस नए निर्णय के तहत, भारतीय यात्रियों के लिए जर्मन हवाई अड्डों से कहां जाना अब आसान हो जाएगा।
हालांकि भारतीयों को अंतरराष्ट्रीय ठहराव के दौरान ट्रांजिट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी, फिर भी यात्रियों को जर्मनी और अन्य शेंगेन देशों में प्रवेश करने के लिए उपयुक्त पर्यटक, व्यावसायिक या छात्र वीजा के लिए आवेदन करना होगा।
