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वायनाड लैंडस्लाइड पीड़ितों की मदद करेंगे गौतम अदाणी, सीएम रिलीफ फंड में 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा

Wayanad Landslide: उद्योगपति गौतम अदाणी ने 'एक्स' पर कहा, वायनाड में हुईं दुखद मौतों से मैं बहुत दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं।अदाणी ग्रुप इस कठिन समय में केरल के साथ खड़ा है। हम केरल के मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में 5 करोड़ रुपये का योगदान देकर अपना सहयोग दे रहे हैं।

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गौतम अदाणी।

Photo : Twitter

Wayanad Landslide: केरल के वायनाड में भारी बारिश के बाद लैंडस्लाइड ने भीषण तबाही मचाई है। यहां कई गांव पूरी तरह से उजड़ चुके हैं और अब तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इस बीच पीड़ितों की मदद के लिए बिजनेसमैन गौतम अदाणी आगे आए हैं। उन्होंने घटना पर दुख जताते हुए केरल मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में 5 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की।

गौतम अदाणी की ओर से इस बारे में सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी जानकारी दी गई है। उन्होंने लिखा, वायनाड में हुईं दुखद मौतों से मैं बहुत दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं।अदाणी ग्रुप इस कठिन समय में केरल के साथ खड़ा है। हम केरल के मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में 5 करोड़ रुपये का योगदान देकर अपना सहयोग दे रहे हैं। बता दें कि केरल की वायनाड में 30 जुलाई की सुबह भूस्खलन हुआ, जिससे अब तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

1200 राहत कर्मी तैनात

वहीं, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में वायनाड हादसे पर बताया कि एनडीआरएफ की चार टीम, आर्मी के चार कालम, नेवी की एक टीम, तटरक्षक बलों की तीन यूनिट, अग्निशमन सेवाओं, राज्य पुलिस स्थानीय इमरजेंसी रिस्पांस टीम समेत लगभग 1,200 कर्मी राहत और बचाव अभियान में 24 घंटे कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार को 145 करोड़ की राशि भी प्रदान कराई गई है। उन्होंने बताया कि बचाव और खोज कार्य में सेना के डॉग स्क्वाड को भी तैनात किया गया है। इसके अलावा आर्मी की डीसी सेंट्रल कन्नूर की दो टुकड़ियां भी तैनात की गई हैं। त्रिवेंद्रम की 91 इन्फेंट्री ब्रिगेड की दो टुकड़ियों को रवाना कर दिया गया है। भारतीय आर्मी के दो हेलीकॉप्टर और नेवी का एक हेलीकॉप्टर बचाव कार्य में विशेष रूप से लगे हैं। सेना की मेडिकल टीम भी घटनास्थल पर मौजूद है और घायलों को चिकित्सा प्रदान कर रही है।

24 घंटे निगरानी कर रहा गृह मंत्रालय

भारतीय नौसेना के जहाज को क्षतिग्रस्त पुल के दूसरी ओर बचाव और भूमि मार्ग से आवाजाही प्रदान करने के लिए तैनात किया गया है। प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त संसाधन भेजे जा रहे हैं। गृह मंत्रालय के दोनों नियंत्रण कक्ष 24 घंटे से निगरानी कर रहे हैं और राज्य को प्रत्येक संभव सहायता प्रदान की जा रही है। 31 जुलाई को स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड से 145 करोड़ की राशि राज्य सरकार को प्रदान कराई गई है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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