पश्चिम बंगाल में सत्ता से हटने के बाद टीएमसी में इस्तीफों और बगावत का दौर जारी है। इस सिलसिले में पार्टी से इस्तीफा देने वालों में सबसे ताजा नाम अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य सचिव मोहम्मद अजमल सिद्दीकी का है। उन्होंने शनिवार को पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की वजह बताते हुए उन्होंने पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और संगठन के मौजूदा माहौल को जिम्मेदार ठहराया। पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्दीकी पार्टी नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
टीएमसी में अल्पसंख्यकों को सिर्फ लॉलीपॉप दिया जाता है
अजमल सिद्दीकी ने कहा कि इस्तीफा देने के बाद मैं बहुत स्वतंत्र महसूस कर रहा हूं।अब मैं काफी हल्का और आराम महसूस कर रहा हूं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर अल्पसंख्यक समुदाय के हितों के लिए काम करने की कोई वास्तविक गुंजाइश नहीं है। सिद्दीकी ने कहा कि टीएमसी में अल्पसंख्यकों के लिए कोई काम करने नहीं दिया जाता। उनके लिए कोई ठोस काम भी नहीं होता, सिर्फ लॉलीपॉप दिया जाता है। यही वजह है कि मैं इस पद पर नहीं रहना चाहता था।
सीएम सुवेंदु अधिकारी की जमकर की तारीफ
अजमल सिद्दीकी ने दावा किया कि पार्टी ने लोगों को डराने और उनका इस्तेमाल करने की राजनीति की है, हालांकि उन्होंने सीएम सुवेंदु अधिकारी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सुवेंदु अधिकारी सभी वर्गों को साथ लेकर चलेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों को धमकाया गया और उनका इस्तेमाल किया गया, लेकिन मुझे सुवेंदु अधिकारी से उम्मीद है कि वह हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को साथ लेकर चलेंगे और बंगाल को सही दिशा में आगे बढ़ाएंगे।
अभिषेक बनर्जी के डर की वजह से पार्टी में शामिल हुए
अजमल सिद्दीकी ने दावा किया कि साल 2015-16 में उन पर टीएमसी में शामिल होने का दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि हम व्यवसाय कर रहे थे। अभिषेक बनर्जी की ओर से बिनॉय मिश्रा ने हमसे पैसे मांगे। हमने पैसे नहीं दिए तो हमारे खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर दिया गया। इसके बाद हमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से जमानत लेनी पड़ी थी। हम अभिषेक बनर्जी के डर की वजह से पार्टी में शामिल हुए थे।
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ममता बनर्जी को लिखा था पत्र
अजमल सिद्दीकी ने अपने इस्तीफे को लेकर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को पत्र लिखा था। इसमें सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया है। उन्होंने पार्टी को अपना समय, ऊर्जा और समर्पण दिया तथा हमेशा संगठन और कार्यकर्ताओं के हित में काम किया। उन्होंने लिखा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही और उन्होंने पार्टी के विस्तार में अपनी भूमिका निभाई, लेकिन अब वह खुद को पार्टी के साथ आगे नहीं जोड़ पा रहे हैं।सिद्दीकी ने कहा कि उनके इस फैसले के पीछे निजी कारण भी हैं, लेकिन पार्टी के मौजूदा माहौल और कार्यप्रणाली को लेकर उनकी गहरी नाराजगी भी एक बड़ा कारण है।
