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'भावनाओं में बहकर RJD में चला गया था...' JDU में घर वापसी पर बोले पूर्व मंत्री श्याम रजक

Shyam Rajak joins JDU: बिहार के पूर्व मंत्री श्याम रजक आज राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा समेत कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में जदयू में फिर से शामिल हो गए। उन्होंने कहा, मैं भावनाओं में बहकर राजद में चला गया था। अब मेरी पूरी आस्था नीतीश कुमार में है।

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जदयू में शामिल हुए श्याम रजक

Photo : Twitter

Shyam Rajak joins JDU: बिहार के पूर्व मंत्री श्याम रजक रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए। उन्होंने मुख्यमंत्री के धुर विरोधी लालू प्रसाद की पार्टी राजद छोड़ने के दो सप्ताह से भी कम समय बाद यह कदम उठाया। बता दें, रजक को 2020 में राज्य मंत्रिमंडल के साथ-साथ जद (यू) से भी निष्कासित कर दिया गया था।

श्याम रजक राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा समेत कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पार्टी में फिर से शामिल हुए। इस मौके पर संजय झा ने कहा कि जमीनी स्तर पर समर्थन वाले नेता रजक के आने से पार्टी को मजबूती मिलेगी, खासकर राज्य के महादलितों के बीच, जिन्हें नीतीश कुमार ने एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता दी है।

भावनाओं में बहकर राजद में चला गया था

इस अवसर पर श्याम रजक ने कहा कि वह भावनाओं में बहकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हो गए थे, लेकिन वहां उन्हें अपमानित महसूस हुआ। उन्होंने कहा, राजद आरोप लगा रहा है कि मैं सिर्फ इसलिए जद (यू) में शामिल हुआ हूं क्योंकि पार्टी सत्ता में है। उन्हें याद रखना चाहिए कि मैं मंत्री पद छोड़कर उनके साथ शामिल हुआ था। लेकिन, उन्होंने मुझे निराश किया।

नीतीश कुमार में मेरी पूरी आस्था

श्याम रजक ने कहा, नीतीश कुमार हमारे नेता हैं और मेरी उनमें पूरी आस्था है। मैं काम करना चाहता हूं और नीतीश कुमार ऐसे नेता हैं जो काम पर ध्यान देते हैं। वो उन लोगों के लिए काम कर रहे हैं जो आज़ादी के 75 साल बाद भी पिछड़ रहे हैं। जहां तक आरजेडी की बात है तो वहां रिश्तों का कोई महत्व नहीं है। कार्यकर्ताओं के लिए रिश्ते हैं ही नहीं, सिर्फ परिवार के सदस्यों के लिए हैं। उन्होंने कहा, मैं शतरंज का एक्सपर्ट खिलाड़ी नहीं हूं। इसलिए धोखा खा गया। वे मोहरे चल रहे थे और मैं रिश्तेदारी निभा रहा था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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