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स्वदेशी LCA Mark1A के पहले स्क्वाड्र्न की यहां होगी तैनाती, दुश्मनों में मचेगी खलबली

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Dec 11, 2023, 12:38 PM IST

LCA Mark1A Fighter: भारतीय वायुसेना अपनी सूची में मौजूद मिग सीरीज के विमानों को एलसीए वेरिएंट से बदलने जा रही है। एलसीए मार्क1ए विमान मिग-21, मिग-23 और मिग-27 की जगह लेगा।

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स्वदेशी एलसीए के पहले स्क्वाड्र्न की तैनाती की तैयारी

Photo : PTI

LCA Mark1A Fighter Aircrafts : स्वदेशी एलसीए (LCA Mark1A) के पहले स्क्वाड्र्न की तैनाती की पूरी योजना तैयार हो गई है। भारतीय वायु सेना पाकिस्तान सीमा के पास राजस्थान के बीकानेर जिले में नाल हवाई अड्डे पर स्वदेशी एलसीए मार्क1ए लड़ाकू विमान का पहला स्क्वाड्रन बनाने की योजना बना रही है। यह लड़ाकू विमान मौजूदा एलसीए मार्क1 तेजस लड़ाकू विमानों से कहीं अधिक उन्नत होगा और इसे नवीनतम स्वदेशी रडार और एवियोनिक्स से लैस किया जा रहा है। एएनआई के मुताबिक, रक्षा सूत्रों ने बताया कि एलसीए मार्क1ए लड़ाकू विमानों का पहला स्क्वाड्रन राजस्थान के नाल हवाई अड्डे पर स्थापित करने की योजना है और इसे वहां तैनात दो मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रन में से एक में शामिल किया जाएगा।

बड़ी संख्या में उत्पादन करने की योजना

सूत्र ने कहा कि पहला एलसीए मार्क1ए विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा फरवरी-मार्च की समय सीमा तक भारतीय वायु सेना को सौंपे जाने की उम्मीद है। एलसीए मार्क1ए लड़ाकू विमानों का अब बड़ी संख्या में उत्पादन करने की योजना है। 83 विमान पहले से ही उत्पादन चरण में हैं और 97 और विमानों के लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। 40 एलसीए मार्क-1 तेजस लड़ाकू विमानों के साथ कुल 220 एलसीए मार्क 1 और एलसीए मार्क1ए विमानों को अगले 8-10 वर्षों में सेवा में शामिल करने की योजना है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने भी लड़ाकू विमानों के उत्पादन तेज लाई है और 2025 तक प्रति वर्ष 24 विमान के आंकड़े तक पहुंचने की उम्मीद है।

मिग-21, मिग-23 और मिग-27 की जगह लेगा

भारतीय वायुसेना अपनी सूची में मौजूद मिग सीरीज के विमानों को एलसीए वेरिएंट से बदलने जा रही है। एलसीए मार्क1ए विमान मिग-21, मिग-23 और मिग-27 की जगह लेगा। जबकि मिग-23 और मिग-27 को सेना द्वारा पहले ही चरणबद्ध तरीके से हटा दिया गया है। विंटेज मिग-21 के दो स्क्वाड्रन अभी भी सेवा में हैं और जल्द ही चरणबद्ध तरीके से हटा दिए जाएंगे। उम्मीद है कि भारतीय वायुसेना भविष्य में मिराज-2000 और जगुआर विमानों की जगह स्वदेशी लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करेगी। रक्षा सूत्रों ने कहा कि योजना के अनुसार, एलसीए मार्क 1 और मार्क 1ए के 10 स्क्वाड्रन, एलसीए मार्क-2 के 12-13 स्क्वाड्रन और रूसी मूल के Su-30MKI के 13 स्क्वाड्रन के साथ एडवांस मध्यम लड़ाकू विमान बनाए जाएंगे जिससे अगले दशक के अंत तक भारतीय वायु सेना का बड़ा हिस्सा तैयार हो जाएगा।

अब केवल 'मेड इन इंडिया' लड़ाकू विमान होंगे

भारतीय वायु सेना एक बात को लेकर भी स्पष्ट है कि उसके पास अब केवल 'मेड इन इंडिया' लड़ाकू विमान होंगे और उसे राफेल लड़ाकू विमानों के दो स्क्वाड्रन द्वारा प्रदान की गई क्षमता के स्तर की स्वदेशी रूप से लगभग 120 मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) की आवश्यकता होगी। इससे दोनों मोर्चों से खतरों से निपटने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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