France Military Exercise 2023 : जहां एक ओर भारत एक नई वैश्विक शक्ति बनकर उभर रहा है तो वहीं दूसरी ओर भारतीय सेनाएं भी खुद को मजबूत कर देश को समृद्ध बनाने में लगी हैं। इसी क्रम में भारत को गौरवान्वित करने वाली एक खबर सामने आई। दरअसल, राफेल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली एयरफोर्स की पहली महिला पायलट शिवांगी सिंह अब युद्धाभ्यास की उस भारतीय टीम का हिस्सा हैं जो कि फ्रांस में चल रहा है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के दल में कुल चार राफेल विमान, दो C-17, दो ll-78 और 165 एयर वॉरियर्स शामिल हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत ने देश के बाहर अपने लड़ाकू राफेल विमान भेजे हैं।
शिवांगी के बारे में जानें
बता दें कि फ्रांस गई हुईं शिवांगी सिंह का चयन 2017 में एयरफोर्स में हुआ था। वायुसेना के महिला लड़ाकू पायलटों के दूसरे बैच में शिवांगी को कमीशन किया गया था। वे मूलरूप से उत्तर प्रदेशके वाराणसी की रहने वाली हैं। तीन वर्ष पहले शिवांगी को राफेल विमान के पायलट के रूप में चुना गया था, जिसके बाद राफेल उड़ाने वाली वो पहली महिला लड़ाकू पायलट बनीं। राफेल उड़ाने से पहले शिवांगी मिग-21 बाइसन एयरक्राफ्ट भी उड़ा चुकी हैं। शिवांगी पंजाब के अंबाला स्थित एयरफोर्स के गोल्डन एरो स्क्वाड्रन का हिस्सा भी रह चुकी हैं।
बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास में शामिल है भारत
वायुसेना के अधिकारी बताते हैं कि फ्रांस में इन दिनों बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास चल रहा है, उसी में भारतीय टीम का हिस्सा बनने के लिए शिवांगी सिंह को भेजा गया है। एयरफोर्स ने इससे पहले अंतरराष्ट्रीय अभ्यास के लिए अवनी चतुर्वेदी को पहली बार भेजा था। उन्हें उस समय अभ्यास धर्म गार्जियन के लिए जापान भेजा गया था।
हजारों सैनिकों ने लिया हिस्सा
यह बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास 17 अप्रैल को फ्रांस के मोंट-डे-मार्सन में शुरू हुआ था और 5 मई तक अनवरत चलता रहेगा। इसमें फ्रांस के बहुत से नाटो और अन्य महत्वपूर्ण सहयोगी सम्मिलित हैं। इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास को फ्रांसीसी रक्षा बल संचालित कर रहे हैं। जो कि अब तक का सबसे बड़ा अभ्यास बताया जा रहा है। क्योंकि इसमें फ्रांस की सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ उनके काफी सहयोगियों को हिस्सा बनाया गया है। खास बात ये है कि इस युद्धाभ्यास में सात हजार से भी ज्यादा नाटो सैनिकों ने भाग लिया है।
ये देश भी हैं शामिल
भारत और फ्रांस के अलावा इस युद्धाभ्यास में जर्मनी, ग्रीस, इटली, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन और अमेरिका भी शामिल हैं। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक इस अभ्यास में भारत की जो भागीदारी है वह उत्कृष्ट कार्य प्रणालियों को सीखकर कर भारतीय वायुसेना की कार्यपद्धति को और भी और समृद्ध करेगी।
(ANI इनपुट के साथ)
